सुनसान इलाके में गहरा गड्ढा! यहां नहीं पहुंचती दुनिया की निगाहें; जाने कैसे चुनते हैं परमाणु परीक्षण की जगह

Nuclear Test Site Selection: दुनिया के सभी देश लगातार अपनी सैन्य शक्तियों को मजबूत कर रहे हैं. किसी भी देश की ताकत का उसके पास मौजूद परमाणु बम और हथियारों से अंदाजा लगाया जाता है. जब भी कोई नया परमाणु बम तैयार होता है तो उसकी टेस्टिंग की जाती है.      

Written by - Ayush Mishra | Last Updated : Nov 8, 2025, 04:28 PM IST
  • ऑपरेशन सीक्रेसी का रखा जाता है खास ध्यान
  • परीक्षण वाली जगह के आस-पास नहीं होती आबादी
सुनसान इलाके में गहरा गड्ढा! यहां नहीं पहुंचती दुनिया की निगाहें; जाने कैसे चुनते हैं परमाणु परीक्षण की जगह

Nuclear Test Site Selection: परमाणु हथियारों का परीक्षण करते समय काफी बातें का ध्यान रखना भी जरूरी होता है. परमाणु हथियार किसी भी देश की ताकत का प्रतीक होते हैं. हालांकि इन हथियारों का काफी ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया है. किसी भी परमाणु हथियार का परीक्षण करने के लिए जगह को बहुत सी बातों का ध्यान रखते हुए चुना जाता है. इस रिपोर्ट में हम आपको इन्हीं चीजों के बारे में बताएंगे. 

कैसै होता है जगह का चुनाव?
जब भी हम किसी नए परमाणु हथियार के बनने की बात सुनते हैं, तो सबसे पहले उसके परीक्षण का ख्याल हमारे दिमाग में आता है. कई लोगों को यह जानना होता है कि आखिर परमाणु हथियार का परीक्षण करने के लिए किसी जगह को कैसे चुना जाता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार परमाणु परीक्षण करने के लिए जगह को चुनना काफी सावधानी पूर्वक और कई चरणों में होने वाली प्रक्रिया है. इस प्रक्रिया में साइंटफिक प्वाइंट्स और सुरक्षा का बेहद ध्यान रखना पड़ता है. किसी भी परमाणु परीक्षण करने की जगह को चुनने के लिए 3 बातें बेहद जरूरी होती हैं. 

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खुले में परीक्षण पर है रोक 
किसी भी परमाणु परीक्षण से पहले जमीन और जियोलॉजिकल स्टेबिलिटी को देखना काफी जरूरी होता है. दुनिया में साल 1963 से किसी भी परमाणु हथियार का खुले में परीक्षण करने पर रोक लगा दी गई थी. जिसके चलते ऐसे परीक्षणों को करने ले लिए सभी देशों को काफी ज्यादा गहरे भूमिगत शाफ्ट यानी गड्ढे का इस्तेमाल करना पड़ता है. इस तरह के परीक्षणों को करने के लिए जमीन की बनावट काफी महत्व रखती है. 

शहरों से दूर होते हैं ठिकाने 
किसी भी परमाणु हथियार का परीक्षण करने के लिए ऐसी जगह को चुना जाता है, जो भूकंपीय रूप से शांत होती है. परमाणु परीक्षण करने के लिए इन साइट्स को शहरों और आबादी से दूर बनाया जाता है. इन जगहों को चुनते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वहां पर किसी तरह की सक्रिय फॉल्ट ना हो. जिस जगह को चुना जाता है वहां की चट्टानें सूखी और सख्त होनी चाहिए. जिससे जब परीक्षण के दौरान गड्ढे को सील किया जाए तो रेडियोधर्मी गैसें बाहर न निकल पाएं. 

जमीन से होना चाहिए काफी गहरा
इस बात का सबसे ज्यादा ध्यान रखा जाता है कि परीक्षण को जमीन के काफी नीचे किया जाए. जगह को चुनने के लिए हाइड्रो जियोलॉजी काफी जरूरी होता है. परीक्षण को करने वाले स्थल का जमीन से काफी ज्यादा नीचे होना जरूरी होता है. जिससे रेडिएशन पानी के जहरीला ना बना पाए. इसी के साथ बफर जोन और ऑपरेशन सीक्रेसी का काफी ज्यादा ध्यान रखा जाता है. जगह को चुनते हुए इस बात का ध्यान रखा जाता है कि इसके आस-पास कोई आबादी न हो और ऑपरेशन सीक्रेसी का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है जिससे दूसरे देशों को परीक्षण का पता न लग पाए. 

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Ayush Mishra

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से ताल्लुक रखने वाले आयुष मिश्रा ने अपनी पत्रकारिता करियर की शुरुआत ज़ी मीडिया के साथ की है. वो फिलहाल ज़ी भारत के लिए ट्रेनी जर्नलिस्ट है. ...और पढ़ें

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