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कुर्सी बचाने के लिए आंदोलनकारियों की सभी मांगे मानने को तैयार हुए इमरान खान

पाकिस्तान में लोकतंत्र की नींव कभी सेना के हाथों तो कभी विरोध मार्च से डावांडोल होते रहती है. कभी कोई सरकार भ्रष्टाचार के मामले में तो कभी कोई सरकार तंत्र को सही ढ़ंग से न चला पाने के मामले में ढ़ह जाती है. पाकिस्तान की नई नवेली इमरान सरकार जिसके एक साल भी पूरे नहीं हुए, उसकी कुर्सी भी खतरे में दिख रही है.

कुर्सी बचाने के लिए आंदोलनकारियों की सभी मांगे मानने को तैयार हुए इमरान खान

नई दिल्ली: सरकार के खिलाफ 'आजादी मार्च' ने इमरान सरकार की नाक में दम कर रखा है. पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ मौलाना फजुल-उर-रहमान ने लाखों की संख्या में न सिर्फ सड़कों पर बल्कि सरकारी आशियानों का घेराव किया. मौलाना की मांग है कि मौजूदा पाकिस्तानी सरकार का तख्तापलट हो. सेना की मदद से जिस सरकार का गठन किया गया है, वह अक्षम सरकार है. इमरान सरकार शुरुआती दौर में जितनी सशक्त इस विरोध मार्च को लेकर दिख रही थी, उतनी ही असहाय अब लगने लगी है. PM इमरान खान ने तथाकथित रूप से अपने मंत्रिमंडल के बैठक में कहा कि सरकार उनकी सभी मांगों को मानने को तैयार है, लेकिन इस्तीफे का तो सवाल ही पैदा नहीं होता.

'आजादी मार्च' को मिल रहा पाक में जोरदार समर्थन

मौलाना ने पिछले दिनों कहा था कि यह चुनाव में धांधली के साथ आई सरकार है. यह सरकार न तो महंगाई पर नियंत्रण कर पा रही है और ना ही अर्थव्यवस्था को सुधार पाने में सक्षम है. इसके अलावा विद्रोह को रोकने के लिए मौलाना रहमान ने सरकार के सामने कुछ शर्तें रखी है. जमात-उल-इस्लामी के रसूखदार नेता फजुल-उर-रहमान को देश की अन्य दो बड़ी पार्टियां पाकिस्तानी मुस्लिम लीग-नवाज और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का भी समर्थन मिला है. इस समर्थन के बाद इमरान सरकार के पैरों के नीचे की जमीन खिसकने लगी है. आजादी मार्च का असर अब न सिर्फ पाकिस्तान में हो रहा है, बल्कि देश-दुनिया में भी इमरान खान की आलोचना हो रही है. 

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प्रतिनिधिमंडल की बैठक में शामिल थे जेयूआई के नेता भी

इसी को लेकर पाकिस्तान की हुकूमत के तमाम नुमाइंदों ने एक प्रतिनिधिमंडल की बैठक की जिसमें रक्षामंत्री परवेज खत्ताक के अलावा पाक के पूर्व पीएम चौधरी शुजात हुसैन भी मौजूद थे. यह बैठक मौलाना के 'आजादी मार्च' का तोड़ निकालने की कोशिश के लिए की गई थी. इसमें जमात-उल-इस्लामी के नेता अकरम खान दुर्रानी को भी शामिल किया गया था ताकि उन मांगों पर चर्चा की जा सके. 

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विरोध से ही सत्ता पर काबिज हुए हैं इमरान भी

मालूम हो कि पाकिस्तान के मौजूदा हुकूमत इमरान खान भी इसी तरह तत्कालीन नवाज शरीफ सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद सत्ता में आए थे. इमरान खान तब तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के उभरते नेताओं में से एक थे. नवाज शरीफ पर तब भ्रष्टाचार के कई मामले लंबित थे. Avonfield properties और Panama paper मामले में शरीफ परिवार पर तब तक कई मामलें कोर्ट में चलने लगे थे. पाक सेना चीफ जनरल बाजवा का साथ पा कर पाकिस्तान के पूर्व पीएम अब्बासी को हटाकर तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के इमरान खान को तख्त पर बिठाया गया, लेकिन पाकिस्तान में कोई भी सरकार अपना कार्यकाल तक पूरा नहीं कर पा रही. ऐसे में इमरान खान कितने समय तक गद्दी बचाए रखते हैं, यह तो विरोध मार्च के बाद पता चल जाएगा.  

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