Imran Khan एक बार फिर दुनिया में बेइज्जत, Pakistan को लगी कड़ी फटकार

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय पर जो अमानवीय अत्याचार होता है, उस पर इमरान खान की बोलती बंद हो जाती है लेकिन वे दुनियाभर की इस्लामिक घटनाओं पर पाकिस्तानी जेहादियों को खुश करने के लिए खूब निम्नस्तरीय बयानबाजी करते हैं और शर्मिंदगी भी झेलती हैं.

Imran Khan एक बार फिर दुनिया में बेइज्जत, Pakistan को लगी कड़ी फटकार

नई दिल्ली: इमरान खान की वजह से पाकिस्तान एक बार फिर से दुनियाभर में बेइज्जत हुआ है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran khan) उन घटनाओं पर मौन धारण कर लेते हैं जो हिंदुओं और सिखों के खिलाफ इस्लामिक कट्टरपंथी करते हैं. पाकिस्तान में हिंदुओं और सिखों के खिलाफ बर्बरतापूर्ण अत्याचार होता है. हाल ही में फ्रांस की घटना पर इमरान खान ने जो टिप्पणी की है उसके लिए पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र को बड़ी फटकार लगी है.

ईशनिंदा के नाम पर इमरान ने किया था आतंकवाद का समर्थन

फ्रांस में कार्टून विवाद की चर्चा दुनियाभर में हुई. इसके बाद कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवादियों ने फ्रांस के चर्च में हमला किया था और इसमें तीन लोगों की जान चली गयी लेकिन इस हमले का समर्थन इमरान खान ने किया तहस.

उल्लेखनीय है कि इमरान खान ने फ्रांस पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया था कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर ईशनिंदा को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. इसके बाद ही यूएन वॉच ने उनके इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा कि आपकी संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार संगठन (UNHRC) में मौजूदगी बर्दाश्त के बाहर है.

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UNHRC ने लगाई फटकार

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के ऊपर लगातार मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप लगते रहे हैं. इसके बावजूद इस साल चीन और रूस के साथ पाकिस्तान को भी संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार संगठन का सदस्य बनाया गया है. उस समय भी यूएन वॉच ने एक बयान जारी कर पाकिस्तान के सदस्य बनने पर कड़ी आपत्ति जताई थी. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की इस टिप्पणी के बाद UNHRC ने फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसी तुच्छ बयानबाजी के लिए पाकिस्तान को मानवाधिकार परिषद से बाहर कर देना चाहिए.

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पाकिस्तान में ईशनिंदा के नाम पर हिंदुओं पर होता है अत्याचार

आपको बता दें कि पाकिस्तान में मुख्यतः हिंदुओं और सिक्खों को प्रताड़ित करने के लिए हमेशा ईशनिंदा कानून का उपयोग किया जाता है. तानाशाह जिया-उल-हक के शासनकाल में पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून को लागू किया गया था. पाकिस्तान पीनल कोड में सेक्शन 295-बी और 295-सी जोड़कर ईशनिंदा कानून बनाया गया. दरअसल पाकिस्तान को ईशनिंदा कानून ब्रिटिश शासन से विरासत में मिला है.

गौरतलब है कि 1860 में ब्रिटिश शासन ने धर्म से जुड़े अपराधों के लिए कानून बनाया था जिसका विस्तारित रूप आज का पाकिस्तान का ईशनिंदा कानून है.

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