खतरे में इमरान सरकार, क्या चली जाएगी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की कुर्सी?

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने गुरुवार को कहा कि वह अपनी सरकार की वैधता साबित करने के लिए शनिवार को विश्वास मत का सामना करेंगे.  

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Mar 5, 2021, 08:40 AM IST
  • इमरान से हुई इस्तीफे की मांग
  • सदन में बहुमत साबित करेंगे इमरान
खतरे में इमरान सरकार, क्या चली जाएगी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की कुर्सी?

नई दिल्ली: पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. गुरुवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा कि वह शनिवार को सदन में अपना बहुमत साबित करेंगे.

अगर वे ऐसा करने में नाकाम रहते हैं, तो वह विपक्ष में बैठेंगे. 

वित्त मंत्री के चुनाव हारने से दबाव में प्रधानमंत्री 
सीनेट में एक कड़े मुकाबले में वित्त मंत्री के चुनाव हारने के बाद इमरान खान पर इस्तीफे का दबाव बढ़ रहा है.  

पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के उम्मीदवार और पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने बुधवार को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के उम्मीदवार शेख को हराकर प्रधानमंत्री खान को एक बड़ा झटका दिया, जिन्होंने अपने मंत्रिमंडल सहयोगी के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रचार किया था.

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खतरे में इमरान सरकार
सीनेट में वित्त मंत्री का चुनाव हारने के बाद क्रिकेटर से नेता बने 68 वर्षीय इमरान खान ने कहा, 'मैं शनिवार  को सदन में विश्वास मत हासिल करूंगा. मैं अपने सदस्यों से यह दिखाने के लिए कहूंगा कि उनका मुझ पर विश्वास है. अगर वे कहते हैं कि उन्हें कोई भरोसा नहीं है, तो मैं विपक्षी बेंच पर बैठूंगा.'

इमरान ने अपने बयान में यह भी कहा, 'अगर मैं सरकार से बाहर होता हूं, तो मैं लोगों के पास जाऊंगा और उन्हें देश के लिए अपना संघर्ष जारी रखने के लिए कहूंगा. मैं इन गद्दारों (जिन्होंने देश को लूटा है) को शांति से नहीं बैठने दूंगा. मैं उन्हें गद्दार कहता हूं क्योंकि वे लुटेरे हैं.'

इमरान से इस्तीफे की मांग
पाकिस्तान की 342 सदस्यीय नेशनल असेंबली में खान की पार्टी के 157 सदस्य हैं. निचले सदन में विपक्षी पीएमएल-एन और पीपीपी के क्रमशः 84 और 54 सदस्य हैं.

पकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी को शनिवार को नेशनल असेंबली का सत्र बुलाने के लिए कहा गया है. साथ ही सत्तारूढ़ दल और उसके सहयोगियों के सदस्यों को शनिवार को इस्लामाबाद में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं.

इस बीच, प्रधानमंत्री खान ने सीनेट चुनाव का उल्लेख करते हुए इसमें भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और उन्होंने सीनेटर बनने के लिए अन्य को रिश्वत देने के आरोप भी लगाए.

खान ने सांसदों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाते हुए पाकिस्तान में लोकतंत्र का मजाक बनाने की बात भी कही. इमरान खान ने 2018 के उस दौर को भी याद किया, जब उनकी पार्टी के 20 सांसदों ने पैसे लेकर अपना वोट कथित तौर पर बेच दिया था.

प्रधानमंत्री ने निर्वाचन आयोग पर चुनाव में भ्रष्टाचार को रोक पाने में नाकाम रहने का भी आरोप लगाया.

गौरतलब है कि गिलानी की जीत के बाद कई विपक्षी नेताओं ने खान की भारी आलोचना की और मांग की कि उन्हें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.

परिणाम घोषित होने के कुछ घंटे बाद विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने विश्वास मत हासिल करने का फैसला किया है.

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