संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाहर जम कर हुआ पाकिस्तान का विरोध

दुनिया भर में भारत का विरोध करने वाले पाकिस्तान को अब समझ जाना चाहिए कि दुनिया भर में उसका भी विरोध होगा क्योंकि दुनिया में आतंक से प्यार करने वाले सिर्फ आतंकी हो सकते हैं, लेकिन भारत से प्यार करने वाले सभी धर्मों और देशों के लोग हैं..  

संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाहर जम कर हुआ पाकिस्तान का विरोध

 

नई दिल्ली. दुनिया के अलग अलग हिस्सों से अब तक समाचार यही आते थे कि पाकिस्तान ने भारत का विरोध किया, अब पाकिस्तान का भी विरोध दुनिया में होने लगा है. हालिया मिसाल देखने को मिली यूएनएचआरसी के 43वें सत्र के दौरान जहां संयुक्त राष्ट्र के बाहर लगाए गए पाक सेना विरोधी पोस्टर. ये प्रदर्शन पाकिस्तान के खिलाफ दुनिया में बढ़ते असंतोष के नजरिए से देखे जा रहे हैं.

 

पाकिस्तान आर्मी स्टॉप सपोर्टिंग टेरेरिज्म !

स्विट्ज़रलैंड का ये शहर है जिनेवा जहां संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 43वें सत्र की बैठक चल रही थी जिस दौरान यह पाकिस्तान के खिलाफ विरोध की मिसाल देखने को मिली. यहां संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाहर ऐसे पोस्टर लगाए गए जिनमें पाकिस्तानी सेना द्वारा आतंकवाद को समर्थन बंद करने के स्लोगन लिखे हुए थे. इन लाल रंग के पोस्टरों में साफ़ तौर पर सफेद रंग से पाकिस्तान की सेना का विरोध किया गया था और इनमें लिखा था - ‘पाकिस्तान आर्मी स्टॉप सपोर्टिंग टेरेरिज्म’

प्रदर्शनकारियों ने जताई नाराज़गी 

जिनेवा के इस यूएनएचआरसी मुख्यालय के बाहर सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्रित हुए. भारत प्रेमी और मानवाधिकार के समर्थक इन प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के हालात को लेकर अपनी नाराजगी जताई.  पाकिस्तानी सेना के हांथों हो रहे अत्याचारों को प्रदर्शनकारियों ने प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया और अपने पोस्टरों पर बने चित्रों में पाकिस्तान में महिलाओं को एक पिंजरे के भीतर कैद  दिखाया. इन पोस्टरों में सेना के द्वारा महिलाओं और बच्चों के खिलाफ किये जा रहे अत्याचारों का प्रदर्शन करते हुए उनका विरोध किया गया 

 

पाक ने अलापा कश्मीर राग 

सोते जगते पाकिस्तान एक ही रोना रोता है -कश्मीर का नाम लेकर. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भी फिर से पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दा भुनाने की कोशिश की. पाकिस्तान के मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी ने मांग की कि कश्मीर में सियासी नेताओं और कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए और उन पर लगे   प्रतिबंध खत्म किये जाने चाहिए.

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