भारत के पड़ोस में है 'दुनिया की छत'! -40°C तापमान, आसमान को छूते पर्वत

Roof of the World: आप लोग जानते हैं क्या की दुनिया पर एक ऐसी जगह भी है, जहां पहुंचकर ऐसा लगता है जैसे आसमान में आ गए हों. जहां हवा इतनी ठंडी है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है, और बादल नीचे दिखाई देते हैं.  

Written by - Ishita Tyagi | Last Updated : Nov 9, 2025, 11:15 AM IST
  • यहां माइनस 40 डिग्री तापमान होता है
  • स्नो लेपर्ड और मार्को पोलो भेड़ मिलते हैं
भारत के पड़ोस में है 'दुनिया की छत'! -40°C तापमान, आसमान को छूते पर्वत

Roof of the World: दुनिया में एक इलाका इतना ऊंचा, रहस्यमयी और इतना सुंदर है कि कभी-कभी विश्वास नहीं होता यह जगह सचमुच दुनिया में है. यहां हर कदम पर खतरा है, जैसे गहरी घाटियां, बर्फ से ढके पहाड़ जिसे लोग कहते हैं दुनिया की छत. आइए आज हम आपको बताएंगे कौन सा पर्वत दुनिया की छत के नाम से जाना जाता है.

कौन सा पर्वत ‘दुनिया की छत’ के नाम से जाना जाता है?
पामीर पर्वत को दुनिया की छत कहा जाता है, क्योंकि ये धरती के सबसे ऊंचे इलाकों में आता हैं. ये मध्य एशिया में स्थित हैं.  पामीर पर्वत को फारसी भाषा में बाम ए  दुनिया कहते हैं, जिसका मतलब भी दुनिया की छत होता है. 
 
पामीर पठार कहां फैला है
पामीर पठार ताजिकिस्तान, चीन, अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमाओं पर फैला हुआ है.  इसका मुख्य भाग ताजिकिस्तान के गोरनो-बादाख्शान क्षेत्र में है. यह पामीर नॉट के नाम से जाना जाता है. सबसे ऊंची  चोटी कोंगुर (7,649 मीटर) चीन में है, जबकि इसमाइल सोमोनी पीक (7,495 मीटर) ताजिकिस्तान में स्थित है. यहां फेडचेंको ग्लेशियर है, जो ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर दुनिया का सबसे लंबा ग्लेशियर है. कराकुल झील (3,914 मीटर ऊंचाई) और सरेज झील जैसी झीलें भी यहां हैं.

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पामीर पर्वत का इतिहास 
18वीं शताब्दी से पामीर को विश्व की छत कहा जाने लगा. प्राचीन काल में सिल्क रोड के व्यापारी यहां से गुजरते थे. स्थानीय भाषाओं में इसे प्याजी पर्वत भी कहते थे, क्योंकि यहां जंगली प्याज उगते थे. 19वीं शताब्दी में रूसी और ब्रिटिश साम्राज्यों के बीच ग्रेट गेम के दौरान यह रणनीतिक महत्व का क्षेत्र बना. आज यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में माना जाता है.

सर्दियों में माइनस तापमान
पामीर की जलवायु शुष्क और कठोर है. सर्दियों में तापमान माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, जिससे नवंबर से अप्रैल तक यह क्षेत्र करीब पहुंच से बाहर हो जाता है। गर्मियों में भी हवाएं तेज चलती हैं. जलवायु परिवर्तन से ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जो बाढ़ और पानी की कमी का खतरा बढ़ा रहा है. यहां दुर्लभ वन्यजीव जैसे स्नो लेपर्ड और मार्को पोलो भेड़ पाए जाते हैं. 

पामीर पर्वत का महत्व 
पामीर सांस्कृतिक और जैव विविधता का केंद्र है. यहां की संस्कृति इस्लामी, बौद्ध और स्थानीय परंपराओं का मिश्रण है. यात्री से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलता है, ताजिकिस्तान सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठन ग्लेशियर को सुरक्षित करने पर काम कर रहे हैं.

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About the Author

Ishita Tyagi

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से ताल्लकु रखने वाली इशिता त्यागी को जनरल नॉलेज की खबरों में खूब दिलचस्पी है. इन्होंने अपनी पत्रकारिता करियर की शुरुआत ज़ी मीडिया के साथ की है. वो फिलहाल ज़ी भारत के लिए ट्रेनी जर्नलिस्ट है. ...और पढ़ें

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