ब्रिक्स सम्मेलन को पीएम मोदी ब्राजीलिया रवाना, इन मुद्दों पर होंगी बातें

ब्रिक्स देशों में दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं. वैश्विक पटल पर इनकी भागीदारी काफी अहम होती है. दुनिया की तेजी से बढ़ती और सशक्त मंचों में से एक ब्रिक्स में विभिन्न विषयों पर मल्टीलेवल बातचीत चलती है. ब्रिक्स की 11वीं शिखर वार्ता में भाग लेने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्राजीलिया निकल चुके हैं.   

ब्रिक्स सम्मेलन को पीएम मोदी ब्राजीलिया रवाना, इन मुद्दों पर होंगी बातें

नई दिल्लीः ब्राजील की राजधानी ब्राजीलिया में आगामी 13-14 नवंबर को ब्रिक्स शिखर बैठक होने वाली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके लिए 12 नवंबर को रवाना हो चुके हैं. ब्रिक्स देशों का यह 11वां संस्करण है जिसमें विश्व के तेजी से बढ़ते पांच देश शामिल हैं. BRICS का मतलब ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से है. प्रधानमंत्री मोदी इस मौके पर पर्यावरण संरक्षण, व्यापार बढ़ाने और अन्य सामरिक महत्व के मुद्दों पर विचार-विमर्श कर सकते हैं. ब्रिक्स देश अर्थव्यवस्था, विश्व में जनसंख्या का हिस्सा और संसाधनों के मामले में अग्रिम वैश्विक संगठनों में गिने जाते हैं. पीएम मोदी ब्रिक्स सम्मेलन में छठवीं बार शामिल होने पहुंचेंगे.

विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में होगा नया समझौता

ब्रिक्स देशों की तरफ से गठित न्यू डेवलपमेंट बैंक की तरफ से एक रिपोर्ट भी पेश की जाएगी साथ ही इस बैंक की तरफ से दूसरे देशों को कर्ज देने के प्रस्ताव पर भी बात होगी. इसके अलावा इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए भी आइ-ब्रिक्स के नाम से एक नया समझौता होगा जो सदस्य देशों को विज्ञान व तकनीकी क्षेत्र में एक दूसरे के ज्यादा करीब लाएगा. इस बैठक में आतंकवाद से निपटने पर भी खास बात होगी. आतंकवादियों को वित्तपोषण, इंटरनेट के प्रयोग, कट्टरपन से मुकाबला, विदेशी लड़ाकों की भर्ती तथा क्षमता निर्माण के खिलाफ पांच उपसमूह गठित करके एक प्रभावी प्रणाली तैयार करेंगे. यह तो होगी इस बार की बातें, जानते हैं कि पिछले पांच अन्य ब्रिक्स बैठकों में क्या खास हुआ है....

2018 ब्रिक्स बैठक के प्रमुख मुद्दे 

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का 10वां संस्करण 25 जुलाई 2018 को दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित किया गया. ब्रिक्स सम्मेलन का जो घोषणापत्र जारी किया गया, उसमें अमेरिकी व्यापार संरक्षणवाद और वैश्विक आतंकवाद से निपटने के लिए एक समग्र रूख का आह्वान किया गया था. घोषणापत्र में कट्टरपंथ से निपटने, आतंकवादियों के वित्त पोषण के माध्यमों को अवरूद्ध करने, आतंकी शिविरों को तबाह करने और आतंकी संगठनों द्वारा इंटरनेट के दुरूपयोग को रोकने जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल रहे.

2017 ब्रिक्स बैठक में ये हुआ था

से 5 सितंबर 2017 तक नौवां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन चीन के जियामेन में आयोजित किया गया. इस बार बैठक का विषय मजबूत साझेदारी और उज्ज्वल भविष्य रखा गया था. इसमें पहली बार पाकिस्तान आधारित आतंकवादी समूह को नामांकित किया गया. ब्रिक्स देशों द्वारा समूचे सदस्यों के बीच व्यापारिक संबंधों को गहरा करने के उद्देश्य से आर्थिक और व्यापार सहयोग सहित चार दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स आर्थिक और प्रौद्योगिकी सहयोग योजना के लिए 500 मिलियन युआन (76.4 मिलियन डॉलर) और ब्रिक्स देशों के न्यू डेवलपमेंट बैंक के लिए 4 मिलियन देने की घोषणा की थी.

 
 2016 ब्रिक्स बैठक के मुख्य बिंदु

इस दौरान ब्रिक्स सम्मेलन से तुरंत पहले उरी आतंकवादी हमला हुआ था. गोवा में हुई बैठक के दौरान पीएम मोदी ने आतंकवाद को पूरी दुनिया के लिए खतरा बताते हुए इससे कड़ाई से निपटने पर जोर दिया साथ ही इस मंच से पाकिस्तान पर जोरदार निशाना साधते हुए उसे आतंकवाद की जन्मभूमि करार दिया था. ब्रिक्स के संदेश में आईएआईएस जैसे संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिबंधित संगठनों का बार-बार जिक्र किया गया. भारत और रूस के बीच 16 अहम रक्षा समझौतों पर दस्तखत हुए. मोदी और पुतिन ने कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट की यूनिट 3 और 4 की नींव रखी. ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत ने सार्क के बजाय बिम्सटेक देशों के राष्ट्राध्यक्षों को न्योता देकर एक बार फिर पकिस्तान को अलग थलग करने की कोशिश की. ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान बिम्सटेक के नेताओं की मुलाकात चीन, रूस, दक्षिण अफ़्रीका और ब्राजील के नेताओं से हुई.
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2015 ब्रिक्स बैठक में क्या-क्या हुआ

7वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन रूस के उफा में 8 व 9 जुलाई 2015 को हुआ. इस बार इसका विषय ब्रिक्स  भागीदारी: वैश्विक विकास के लिए शक्तिशाली कारक रहा था. सम्मेलन के अंत में ब्रिक्स देशों के नेताओं ने ऊफा घोषणा-पत्र जारी किया. इसमें उभरती चुनौतियों का जवाब देने में समन्वित प्रयासों को बढ़ावा देने, शांति और सुरक्षा को सुनिश्चित करने, सदस्य देशों के बीच एक स्थायी विकास को बढ़ावा देने की बात कही गई थी. 2014 में जिस विकास बैंक की स्थापना का फैसला लिया गया था, 2015 में उसका उद्घाटन किया गया. विकास बैंक मुख्य रूप से ब्रिक्स के सदस्य देशों, ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका में ढांचागत परियोजनाओं के लिए ऋण उपलब्ध कराएगा. यह बैंक साल के अंत तक निवेश के लिए अपनी पहली परियोजनाओं का चयन करेगा. प्रसिद्ध भारतीय बैंकर केवी कामत इस बैंक के पहले प्रमुख रहे.
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2014 ब्रिक्स बैठक की खास बातें


15-16 जुलाई 2014 को ब्राजील के फोर्टालेजा और ब्रासीलिया में छठवां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था. इस शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय रहा समावेशी वृद्धि, सतत विकास रहा था. दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता वाली इस बैठक में 100 अरब डॉलर की शुरुआती अधिकृत पूंजी के साथ नए विकास बैंक की स्थापना का फैसला किया गया था. इसे ब्रिक्स कंटिंजेंट रिजर्व अरेंजमेंट का नाम दिया गया था. जिसे अल्पकालिक नकदी समस्याओं से बचने के लिए बनाया गया था. इस समझौते की रूपरेखा में नकदी के आदान-प्रदान का प्रावधान किया गया था. इसके जरिए अल्पकालिक अदायगी दबाव संतुलन की स्थिति से निपटा जा सकेगा. रूस ने भविष्य की उर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संयुक्त उर्जा कोष बनाने का सुझाव दिया था.