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पाकिस्तान नहीं संभल रहा, मगर इमरान को पता है 'औरंगजेब काल' की GDP!

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से खुद का देश संभल नहीं रही है और वो औरंगजेब काल की GDP बताने में लगे हुए हैं. इमरान खान का एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसके पाद उनके उपर ना सिर्फ हंसी आएगी बल्कि तरस भी आ जाएगी.

पाकिस्तान नहीं संभल रहा, मगर इमरान को पता है 'औरंगजेब काल' की GDP!

नई दिल्ली: पाकिस्तान जिसकी अर्थव्यवस्था विदेशी भीख और कर्ज पर टिकी हुई है, उसके प्रधानमंत्री इमरान खान मुल्क को बदहाली के गर्त से बाहर निकालने की जगह 400 साल पुराने इतिहास में गोते लगा रहे हैं. पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम ने अपने देश की कंगाली, बदहाली, फटेहाली से लोगों की नजर हटाने के लिए अब मुगल शासक औरंगजेब की आड़ ली है. 

जिस इमरान खान ने अपने मुल्क की अर्थव्यवस्था को चौपट कर डाला, वो जनता को ये बताते फिर रहे हैं कि औरंगजेब के जमाने में मुगल काल की अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे अव्वल थी और तब जीडीपी 24 फीसदी थी. उन्होंने किस लेखक की इतिहास की किताब पढ़ ली कि मुगल काल की जीडीपी के हिसाब-किताब गिनाने बैठ गए.

दरअसल पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने कहा है कि 'जब औरंगजेब इस दुनिया से गया तो हिंदुस्तान, मुगल इंडिया की जीडीपी थी वो 24 फीसदी थी दुनिया की. यानी दुनिया की जो सारी सबसे ज्यादा जो दौलत थी वो हिंदुस्तान में थी.'

भ्रम फैलाने में इमरान का कोई जवाब नहीं

पाकिस्तानियों को भरमाने के लिए जिस औरंगजेब की गाथा इमरान खान अपने देशवासियों को सुना रहे हैं, इतिहास के पन्ने उसकी क्रूरता से भरे पड़े हैं. औरंगजेब वही बर्बर बेटा था जिसने सत्ता के लिए अपने पिता और ताजमहल बनवाने वाले शाहजहां को सलाखों के पीछे डाल दिया था. ये वही औरंगजेब था जिसने अकबर की तरफ से हटाए गए जजिया कर को फिर से लागू किया था जो गैर-मुस्लिमों से वसूला जाता था. ऐसे में सवाल ये है कि क्या औरंगजेब का जिक्र कर इमरान खान देशवासियों को कट्टरत की घुट्टी पिलाना चाह रहे हैं ताकि जनता रोटी की भूख को भूल जाए और भ्रम में पलता रहे. 

इमरान खान ने आगे ये भी कहा कि औरंगजेब के बाद कोई काबिल उत्तराधिकारी नहीं आया जो अर्थव्यवस्था को संभाल सके. इस बयान के जरिए इमरान अपनी खुद की पोल भी खोल रहे हैं कि उनमें मेरिट नहीं है इसलिए तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुधार नहीं पा रहे

पाकिस्तान की असल हालत

इमरान खान को औरंगजेब की अर्थव्यवस्था याद आ गई, लेकिन पाकिस्तान की इकोनॉमी पर उन्हें शर्म नहीं आ रही है. हाल ये है कि पाकिस्तान की जो जीडीपी 2018 में 5.5 फीसदी थी वो इस साल दो फीसदी से ज्यादा गिरकर 3.3 फीसदी तक पहुंच गई है और गिरावट का दौर अभी जारी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का ऐसा ही सूरत-ए-हाल रहा तो अगले साल जीडीपी 2.4 फीसदी तक गिर सकती है

नया पाकिस्तान बनाने का वादा कर जब इमरान खान पिछले साल सत्ता में आए थे तक मुल्क की इकोनॉमी 315 बिलियन डॉलर थी लेकिन आज की तारीख में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सिकुड़ कर 270 बिलियन डॉलर तक सिमट गई है.

अर्थव्यवस्था का बुरा हाल ये है कि पाकिस्तान के उद्योग-धंधे और कारोबार चौपट होते जा रहे हैं. उद्योगपतियों को भी पीएम इमरान खान पर भरोसा नहीं है इसलिए पिछले दिनों कारोबारियों ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल बाजवा से मुलाकात कर मदद की गुहार लगाई थी. इमरान हुकूमत में पाकिस्तान के शेयर मार्केट डूब रहे हैं और निवेशकों को करीब 60 बिलियन डॉलर का बेहद भारी-भरकम नुकसान हो चुका है

पाकिस्तानी करेंसी का भाव इस कदर गिर रहा है कि एक अमेरिकी डॉलर, 156 पाकिस्तान रुपए के बराबर हो गया है.

अर्थव्यवस्था का बुरा हाल तो है ही, महंगाई भी पाकिस्तान में आसमान पर पहुंच गई है. जब एक-एक रोटी 25-30 रुपए के भाव में बिक रही हों तो समझा जा सकता है कि पाकिस्तानियों के लिए पेट भरना भी कितना मुश्किल हो गया है. पाकिस्तान में महंगाई दर के आंकड़े भी इसी तरफ इशारा करते हैं पिछले साल यानी 2018 में पाकिस्तान में महंगाई दर साढ़े तीन फीसदी दर्ज हुई थी जो इमरान हुकूमत में तीन गुना रफ्तार से बढ़ते हुए इस साल साढ़े दस फीसदी तक पहुंच गई है.

विदेशी भीख पर पल रहा पाकिस्तान इमरान हुकूमत में कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है फिर भी और कर्ज की मांग कर रहा है.  खुद पीएम इमरान खान चीन से लेकर अमेरिका तक भीख का कटोरा लेकर दौड़ लगा चुके हैं लेकिन कर्ज देने के मामले में इन देशों ने भी कटौती शुरू कर दी है.

कर्ज में पाकिस्तान इस कदर गर्दन तक धंसा हुआ है कि उसे बजट का सबसे बड़ा हिस्सा तो ब्याज के तौर पर ही चुकाना पड़ता है. यहां तक कि कर्ज की किश्तें और ब्याज चुकाने के लिए भी उसे लोन की जरूरत पड़ रही है. कई देशों और एजेंसियों से लिए लोन को जोड़ दें तो पाकिस्तान पर 6 लाख करोड़ का विदेशी कर्ज है. 

इस हिसाब से हर पाकिस्तानी पर 3 लाख रुपए का कर्ज है यानी पाकिस्तान में हर बच्चा पैदा होते ही 3 लाख का कर्जदार हो जाता है. 

कर्ज में डूबते जा रहे पाकिस्तान और जर्जर होती मुल्क की अर्थव्यवस्था के लिए लोग सीधे इमरान खान को दोष दे रहे हैं और उन्हें चोर तक करार दे रहे हैं. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को जर्जर करने में भ्रष्टाचार का भी एक बड़ा हाथ है जिसकी तरफ खुद पीएम इमरान खान भी इशारा कर रहे हैं. इमरान ने सार्वजनिक तौर पर माना है कि उनकी हुकूमत में अर्थव्यवस्था को संभालने की मेरिट नहीं है और न ही सरकार करप्शन पर लगाम लगा पा रही है.

पाकिस्तान में आर्थिक बदहाली की सूरत की गवाही आंकड़े भी देते हैं. इमरान हुकूमत में पाकिस्तान में डेढ़ मिलियन यानी 15 लाख लोगों की नौकरियां चली गईं.

पाकिस्तान की 29.5 फीसदी गरीबी रेखा से नीचे है मतलब कि कमोबेश हर तीसरा पाकिस्तानी गरीबी रेखा से नीचे.

करीब 55 मिलियन पाकिस्तानियों के नाम गरीबी रेखा के नीचे है.

इमरान के शासनकाल में गरीबी रेखा की लिस्ट में 8 मिलियन और लोगों के नाम जुड़ गए हैं.

जो इमरान खान एक करोड़ जॉब देने का वादा कर सत्ता में आए थे, आज वही सरकारी विभागों को खत्म कर नौकरियां खाने में जुटे हुए हैं. खुद इमरान खान के मंत्री डंके की चोट पर कहते फिर रहे हैं कि नौकरियों के लिए सरकार का मुंह नहीं ताको, अपना खुद देख लो.

पाकिस्तानी मंत्री फव्वाद चौधरी ने हाल ही में कहा था कि 'सरकार जो है वो नौकरियां देने के लिए नहीं है. मैं बताना चाहता हूं कि सरकार 400 विभाग खत्म कर रही है. अगर आप नौकरियों के लिए सरकार की तरफ देखना शुरू कर देंगे तो हमारी इकोनॉमी ही बैठ जाएगी. बहुत जरूरी है लोगों के दिमाग में ये डालना कि सरकार की तरफ नौकरियों के लिए नहीं देखा जा सकता.'

पाकिस्तान के लोग इमरान खान से पूरी तरह से नाउम्मीद हो गए हैं. इमरान हुकूमत से भड़के पाकिस्तानी अपने पीएम की तुलना मंगोलिया के कट्टर, लुटेरे और खूनी शासक चंगेज खान से कर रहे हैं.

पाकिस्तान को रियासत-ए-मदीना बनाने की बार-बार बात करने वाले इमरान से जब मुल्क और मुल्क की अर्थव्यवस्था संभल नहीं रही तो हाथ में कटोरा लिए वो औरंगजेब का जाप करने लगे हैं. शायद ये इमरान खान का नया फरेब है. पहले कश्मीर-कश्मीर की रट लगाई. कश्मीर के नाम पर जिहाद की बात कही. और अब औरंगजेब के बहाने धर्म-मजहब का कार्ड खेलकर इमरान खान जनता को गुमराह करने में जुटे हैं.