Putin भारत-चीन विवाद में घुसे हैं ग्रेटर यूरेशिया का सपना लेकर

एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश है रूस की. एक तरफ तो अमेरिका की दक्षिण एशिया में बढ़त को रोकना दूसरी तरफ एशिया और यूरोप को मिला कर ग्रेटर यूरेशिया की रचना करना..

Putin भारत-चीन विवाद में घुसे हैं ग्रेटर यूरेशिया का सपना लेकर

नई दिल्ली. वास्तव में भारत और चीन के विवाद में रूस के उतरने की एक बड़ी वजह रूस का ग्रेटर यूरेशिया का सपना है. इस बड़े प्लान पर काफी समय से काम कर रहे हैं रूसी प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन. जहां एक तरफ भारत-चीन मामले में भारत से मैत्री दिखाते हुए अमेरिका भारत के साथ है तो दूसरी तरफ रूस मध्यस्थता कराने के बहाने से मैदान में उतर गया है. 

एससीओ की बैठक में हुआ साफ़ 

भारत और चीन के बीच जारी विवाद में रूस की दिलचस्पी दुनिया को हैरान नहीं कर रही थी क्योंकि भारत का पुराना मित्र रूस भारत के नए मित्र अमेरिका की राजनीतिक काट बन कर मैदान में उतरा है. भारत के अधिक करीब आ कर जहां वह अमेरिका के भारत से जुड़े हितों पर ताला मारने की कोशिश में है वहीं वह दक्षिण एशिया में अमेरिकन दखलंदाज़ी की संभावना को भी समाप्त करना चाहता है. रूस की यह मंशा शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में साफ़ हो गई है. 

रूसी विदेश मंत्री ने लिया श्रेय 

भारत-चीन विवाद पर रूस की सक्रियता अमेरिका से अधिक देखी गई है. रूस ने खुद ही शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान अपनी महत्वकांक्षा का राज़फाश कर दिया है. जिस समय भारत और चीन के विदेश मंत्री सीमा पर शान्ति के लिए राजी हो गए तब अचानक रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इसका श्रेय स्वयं ले लिया. दूसरे शब्दों में  कहें तो उन्होंने जता दिया कि उन्होंने चीन से बात करके इस समझौते की बुनियाद डाली है. 

मॉस्को ने प्रदान किया मंच

रूस के विदेश मंत्री ने समझदारी दिखाते हुए सीधे ही नहीं कह दिया कि भारत और चीन के बीच शांति समझौता रूस की मध्यस्थता के कारण सम्भव हुआ है, बल्कि सेर्गेई ने इस बात को इस तरह प्रस्तुत किया कि - मॉस्को ने चीन और भारत को एक मंच उपलब्ध कराया है जिसका मकसद दोनों देशों की सीमा पर शांति की स्थापना करना है. 

ये भी पढ़ें. होगी भगोड़े की वापसी? Nawaz Sharif सियासत की दूसरी पारी खेलने को इच्छुक