क्या चीन से पाकिस्तान को भिड़ाना चाहते हैं शाहिद अफरीदी ?

पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने प्रधानमंत्री इमरान खान को घेरने की कोशिश की है. उन्होंने एक बयान जारी किया कि वे चीन में उइगुर मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचारों पर कभी कुछ क्यों नहीं बोलते. उन्होंने पाकिस्तानी पीएम को इस बारे में सोचने के लिए भी कहा है. 

क्या चीन से पाकिस्तान को भिड़ाना चाहते हैं शाहिद अफरीदी ?

नई दिल्ली: पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर और विस्फोटक बल्लेबाज शाहिद अफरीदी ने प्रधानमंत्री इमरान खान जो खुद अपने जमाने के एक धुआंधार गेंदबाज थे, उनकी तरफ एक गुगली फेंकी है. अब देखना यह है कि क्या इमरान उसे अच्छे से हैंडल कर पाते हैं या आउट हो जाएंगे. दरअसल, अफरीदी ने इमरान खान से चीन के शिंगजियांग प्रदेश में बसे उइगुर मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचारों के बारे में कुछ कदम उठाने की अपील की है. उन्होंने इमरान खान से यह आग्रह किया कि वह चीन में उइगर मुसलमानों के साथ होने वाले जुल्म पर आवाज उठाएं, कुछ करें.

चीन पर निर्भरता के कारण मूकदर्शक बना रहता है पाक

बहरहाल यह बात किसी से छुपी नहीं कि चीन पर पाकिस्तान की निर्भरता किस कदर है. ऐसे में पाकिस्तान लगातार उइगर मुसलमानों के मुद्दे को चीन का आंतरिक मामला बताकर कुछ भी करने या बोलने से बचता रहता है. यहां तक की वह उसे चीन का आंतरिक मसला तक बताता है. वहीं भारत के मामलों में एजेंडा सेट कर किसी भी तरह से बस आलोचना करता है और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है.

अफरीदी ने उइगुर मुस्लिमों पर अत्याचार रोकने की गुजारिश की 

अफरीदी ने इसको लेकर ट्वीट किया कि उइगर मुसलमानों के खिलाफ जुल्म सुनकर दिल बैठता जा रहा है. उन्होंने पाकिस्तान के हुक्मरान इमरान खान से गुजारिश की कि वह मुस्लिम समुदाय को संगठित करने की बात कहते हैं तो इस बारे में भी जरूर सोचें. 

शिनजियांग में एक करोड़ से ज्यादा है उइगुर की आबादी

शाहिद अफरीदी यहीं नहीं रुके. उन्होंने आगे कहा कि चीनी हुकूमत से अपील है कि वह भगवान के लिए, अपने मुल्क में मुसलमानों का उत्पीड़न न करे, उसे रोके. ड्रैगन चीन के शिनजियांग इलाके में एक करोड़ से भी अधिक उइगर मुस्लमान रहते हैं जिन्हें कथित रूप से डिटेंशन सेंटर तक में रखा जाता है. वे अल्पसंख्यक वर्ग हैं. रिपोर्टों के हवाले से यह खबर आती रहती है कि उनपर बहुत ज्यादती की जाती है.

पिछलग्गू पाक नहीं कुछ कहता चीन को

मालूम हो कि उइगुर और अन्य अल्पसंख्यकों के उत्पीडऩ के आरोप में अमेरिका ने चीन की 28 सरकारी व गैरसरकारी संस्थाओं पर कड़ा प्रतिबंध लगा नकेल कसने की कोशिश की. हालांकि, यह प्रयास फिर भी नाकाम रहा. विस्तारवादी रवैये वाला चीन अपने सीधे शब्दों में यह कहता है कि अपने देश के आंतरिक मसलों में वह किसी की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं करेगा. और उसका पिछलग्गू देश पाकिस्तान उसे नाराज करने की कभी हिमाकत नहीं करता.