क्या सिखों के बलबूते कनाडा में बन पाएगी ट्रूडो की सरकार ?

दुनिया में अप्रवासियों की आबादी में भारत का हिस्सा बहुत बड़ा है. कई बार यही आबादी उनके लिए मुसीबत का कारण बनती है तो कई बार निर्णायक भूमिका भी निभाती है. कनाडा में सिखों की आबादी के प्रभाव का ही नतीजा है कि वहां के प्रधानमंत्री ने उनसे सरकार बनाने में सहयोग की मांग की है.     

क्या सिखों के बलबूते कनाडा में बन पाएगी ट्रूडो की सरकार ?

नई दिल्ली: क्षेत्रफल के हिसाब से विश्व के दूसरे सबसे बड़े देश कनाडा में चुनाव परिणाम के बाद सिखों की जरूरत महसूस की जाने लगी है. कनाडा में सिखों की संख्या तकरीबन 4 लाख 70 हजार है और फिलहाल ये कहना गलत नहीं होगा कि जस्टिन ट्रूडो अगर दोबारा प्रधानमंत्री बनते हैं तो इसमें किंगमेकर की भूमिका सिख ही निभाएंगे. 

बहुमत से वंचित रह गई ट्रूडो की लिबरल पार्टी
रअसल, कनाडा के आमचुनाव में जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें तो मिली लेकिन बहुमत से फिर भी पीछे ही रह गई. अब सरकार बनाने के लिए उन्हें कनाडा में सिखों का प्रतिनिधित्व कर रही पार्टी NDP (न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी) के साथ की जरूरत है. एनडीपी के प्रमुख जगमीत सिंह ने ट्रूडो की लिबरल पार्टी के साथ गठबंधन सरकार बनाने पर कुछ शर्तों की सहमति के बाद हामी भर दी है. उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि ट्रूडो को इस बात की जानकारी है कि वे अल्पमत में हैं और अब उन्हें साथ मिलकर काम करना होगा. 

एनडीपी ने रखी है गठबंधन की कुछ शर्तें
जगमीत सिंह ने इससे पहले ही लिबरल सरकार के साथ गठबंधन में आने से पहले ही कुछ शर्त रखी थी. राष्ट्रीय फार्माकेयर योजना के समर्थन को लेकर, हाउसिंग मे निवेश को लेकर, छात्रों के कर्ज की समस्या के निपटारे और पर्यावरण को लेकर कुछ सकारात्मक कदमों के मसले एनडीपी के शर्तों में शामिल हैं. कनाडा के आमचुनाव में बहुमत की सरकार बनाने के लिए ट्रूडो को 338 में से 177 सीटों पर जीत दर्ज करने की जरूरत थी. लेकिन लिबरल पार्टी 157 सीटों पर सिमट गई. जगमीत सिंह के नेतृत्व में एनडीपी को 24 सीटें मिली हैं और अब जस्टिन ट्रूडो को दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के लिए एनडीपी के सहयोग की जरूरत है, जिसपर जगमीत सिंह ने हामी भर भी दी है. 

भारत के बाद सबसे ज्यादा सिख कनाडा में 
बता दें कि भारत के बाद कनाडा में सबसे अधिक सिखों की संख्या है. 4 लाख 70 हजार की आबादी वाले सिख कनाडा में रसूखदारों की भूमिका में नजर आते हैं. ट्रूडो की पिछली सरकार में 4 सिखों को कैबिनेट मंत्रिमंडल में प्रमुख पद मिला था. इसके अलावा हाउस ऑफ कॉमन्स में चुने गए भारतीय मूल के 19 लोगों में से 17 तो लिबरल पार्टी के ही थे. कनाडा में सिखों की चलती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत दौरे पर आए कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अपने पूरे परिवार के साथ अमृतसर के गोल्डेन टेंपल में मत्था टेकने पहुंचे थे.