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क्या सीरिया के खिलाफ तुर्की कर रहा है रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल ?

सीरिया पर हमले के बाद तुर्की चौतरफा घिरा हुआ है. एक तरफ तो रूस ने सीरिया को सैन्य मदद दी है, तो दूसरी ओर अमेरिका ने तुर्की पर आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं. इस संकट से तुर्की अभी निकल नहीं पाया था कि अब वह एक नये संकट में घिरता नजर आ रहा है. 

क्या सीरिया के खिलाफ तुर्की कर रहा है रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल ?

नई दिल्ली: कुर्दों पर हमले के बाद तुर्की को पूरे विश्व से तीखी प्रतिक्रिया झेलनी पड़ रही है. विश्व की दोनों बड़ी शक्तियों अमेरिका और रूस ने तुर्की के इस कदम की निंदा करते हुए सीरिया का साथ दिया है. ऐसा बहुत कम ही हुआ है कि दोनों महाशक्तियां किसी मसले पर एक साथ खड़ी नजर आई हों, इसके बावजूद तुर्की पीछे हटने को तैयार नहीं है. इसी बीच तुर्की के उत्तरी सीरिया पर किए गए हमले के बाद एक ऐसी बात निकल कर सामने आई है जो फिलहाल दुनिया के लिए चौंकाने वाली हो सकती है. दरअसल, तुर्की शक के घेरे में है कि वह युद्ध में केमिकल वीपंस( रसायनिक हथियारों) का इस्तेमाल कर रहा है. हालांकि इस बात को तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोवान ने मानने से इंकार किया है.

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोवान ने इस्तांबुल के डोलमाबेस पैलेस में विदेशी पत्रकारों की एक छोटी सी टीम को बुलाया था. उसी दौरान एक पत्रकार ने उत्तरी सीरिया में हुए हमलों की एक तस्वीर दिखाई जिसमें एक बच्चे का शरीर वायरस युक्त कीड़ों से सड़ा हुआ था. इस तस्वीर के सहारे पत्रकार ने तुर्की के राष्ट्रपति से सवाल पूछा कि क्या तुर्की युद्ध में रसायनिक हथियारों का प्रयोग कर रहा है जिसे राष्ट्रपति एर्दोवान ने तुरंत मना किया. उन्होंने पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि तुर्की के पास कोई रसायनिक हथियार है ही नहीं और ना ही रसायनिक हथियार के प्रयोग में लाए जाने की बात में कोई सच्चाई है. 

 

राष्ट्रपति ने आरोपों को बताया झूठ

तुर्की के राष्ट्रपति ने इसके बाद पत्रकारों को एक बुकलेट उपलब्ध कराई जिसके कवर पेज पर लिखा था "मिथ्या और तथ्य- ऑपरेशन पीस स्प्रिंग अगेंस्ट मिसइंफॉर्मेशन". इसके जरिए उन्होंने बताया कि तुर्की के सीरियन ऑपरेशन के खिलाफ कैसे एक षडयंत्र रचा जा रहा है और इसे बदनाम कर देश और विश्व में तुर्की के खिलाफ एक माहौल खड़ा किया जा रहा है. इसके अलावा अपने इस तथ्य को सच साबित करने के लिए उन्होंने कुछ तस्वीरों का सहारा लिया. उनमें से एक तस्वीर में एक आदमी के शरीर पर जले-कटे निशानों को दिखाया और बताया कि इस तस्वीर का इस्तेमाल तुर्की के खिलाफ मिथ्या प्रचार के लिए किया जा रहा है, जबकि यह तस्वीर 2009 में इजरायल की ओर से गाजा पट्टी पर किए गए हमलों की है. 

जर्मनी और फ्रांस निर्मित हैं हथियार

बता दें कि तुर्की जिन हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है, उनमें से ज्यादातर जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस में बनाए गए हैं. ऐसे में कुर्द कबीले और उत्तर सीरिया के खिलाफ रसायनिक हथियारों के इस्तेमाल करने की बात अगर सच साबित होती है तो तुर्की के लिए यह एक मुसीबत बन सकती है. तुर्की पर पहले ही अमेरिका ने कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र ने भी सीरिया पर हमले के बाद तुर्की को आगाह किया है. ऐेसे में तुर्की का हाल इराक और ईरान के जैसा न हो जाए, इससे पहले उसे संभलना होगा.