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कश्मीर पर भारत का विरोध करने वाले तुर्की के बुरे दिन शुरु

संयुक्त राष्ट्र की बैठक में कश्मीर मुद्दा उठाकर पाकिस्तान का समर्थन और भारत का विरोध करने वाले तुर्की के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई शुरु हो गई है. सीरिया में कुर्द इलाके पर तुर्की की बमबारी का विरोध करने के लिए वहां की सेना रवाना हो गई है. भारत में सीरिया के राजदूत ने भी भारत द्वारा तुर्की के हमले के विरोध का स्वागत किया है. 

कश्मीर पर भारत का विरोध करने वाले तुर्की के बुरे दिन शुरु
तुर्की के खिलाफ सीरिया की फौज

नई दिल्ली: भारत का विरोध करने वाले तुर्की के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घेरेबंदी शुरु हो गई है. तुर्की की फौज ने सीरिया में घुसकर कुर्द इलाकों पर हमला करने का दुस्साहस किया था. जिसका जवाब देने के लिए सीरिया की सेना कुर्द इलाके की तरफ बढ़ गई है. वह तुर्की के हमले के खिलाफ कुर्द लड़ाकों का सहयोग करेंगे. 

दोहरे संकट में फंस सकता है तुर्की
सीरिय की सरकारी मीडिया ने जानकारी दी है कि रूस समर्थित उसकी सेना ने तुर्की की सीमा से 30 किलोमीटर दूर दक्षिण में ताल तामेर और मानबिज शहर में पहुंच गई है. तुर्की ने कुर्द नेतृत्व वाले सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेस (एसडीएफ़) के कब्ज़े वाले क्षेत्रों में भारी बमबारी की थी. जिसमें दोनों तरफ के सैकड़ो लोग मारे गए थे. इस इलाके से अमेरिका ने अपनी फौजें वापस बुला ली थीं. जिसके  बाद तुर्की इन इलाकों में लगातार हमले कर रहा है. 

तुर्की के हमले से इलाके में अफरा तफरी
कुर्द प्रशासित इलाकों में तुर्क सेना के हमले से चारो तरफ अफरा तफरी फैल गई है. तुर्क फौज ने अपनी सीमा से लगे सीरियाई शहरों रास अल-ऐन तथा तल आब्यद शहरों को कब्जे में ले लिया है. लेकिन हमले के कारण फैली अस्थिरता के कारण वहां बंदी बनाकर रखे गए इस्लामिक स्टेट के आतंकियों के फरार होने की खबरें सामने आई हैं. कुर्द लड़ाकों ने अमेरिका के सहयोग से बड़ी मुश्किल से इस्लामिक स्टेट के आतंकियों पर काबू पाया था. लेकिन तुर्की के हमले से उनके आजाद होने का खतरा बढ़ गया है. बताया जा रहा है कि तुर्की के हमले के बाद इस्लामिक स्टेट के 800 खूंखार आतंकवादी फरार हो गए हैं. 

पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है तुर्की  
तुर्की पर सैन्य अभियान रोकने का भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव है. लेकिन वहां के राष्ट्रपति रिचेप तैयप्प एर्दोगन इसे रोकने के लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने कहा है कि कुर्दों के खिलाफ तुर्की का अभियान जारी रहेगा. तुर्की की योजना है कि वह कुर्दों को तुर्की-सीरिया से लगे इलाकों के 32 किलोमीटर अंदर धकेल दे. जिससे कि वह अपने इलाके में मौजूद 20 लाख से ज्यादा सीरियाई शरणार्थियों को फिर से बसा पाए. 

ट्रंप दे चुके हैं तुर्की को धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार बार तुर्की को हमला रोकने के लिए चेतावनी दे रही हैं. उन्होंने तुर्की पर कड़े प्रतिबंध लगाने की भी चेतावनी दी है. लेकिन तुर्की अपने हमले रोकने के लिए तैयार नहीं है. संयुक्त राष्ट्र मानवीय एजेन्सी के मुताबिक तुर्की के हमले की वजह से 1.6 लाख लोग विस्थापित हुए हैं. यह इस इलाके में बड़े मानवीय संकट का कारण बन गया है. 

भारत भी है तुर्की के खिलाफ
कश्मीर पर पाकिस्तान का साथ देने वाले तुर्की के खिलाफ भारत ने भी सख्त रवैया अपनाया है. हमारे विदेश मंत्रालय ने सीरियाई क्षेत्र में तुर्की के हमले की निंदा की है. भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि कश्मीर मसले पर पाकिस्तान का समर्थन करने वाला तुर्की किसी भी सूरत में भारत से सहयोग की उम्मीद नहीं रखे. 

सीरिया ने भारत सरकार के रवैये का किया समर्थन
भारत में सीरिया के राजदूत कामेल अब्बास ने तुर्की पर भारत के बयान का स्वागत किया है. उन्होंने स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारत की मजबूत आवाज है. तुर्की के हमलों की निंदा से भारत के सीरिया से रिश्ते और मजबूत हुए हैं. भविष्य में हम अपना सहयोग और बढ़ाएंगे. 

कश्मीर पर भारत के रुख का समर्थन
सीरियाई राजदूत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अंग है और भारत ने नागरिकों के हित में वहां से अनुच्छेद 370 हटाया है. यह पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है और इस पर किसी अन्य देश को बोलने का अधिकार नहीं है. अब्बास ने कहा कि तुर्की आतंकवाद का समर्थन करने वाला देश है और जो देश उसे समर्थन दे रहे हैं, वे भी आतंकवाद समर्थक हैं. 
अब्बास ने बताया कि उन्होंने भारत के विदेश मंत्री से मुलाकात की है और सीमा पार आतंकवाद के मसले पर भारत के रुख का समर्थन किया है. भारत सरकार की ओर से उन्हें दवा, खाद्य पदार्थ और जरूरी सामानों की सप्लाई जारी रखने का भरोसा मिला है. 

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