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तो क्या कुत्तों के खौफ से भारत के सामने घुटने टेक देगा पाकिस्तान?

आतंकवाद के निर्यातक और पूरी दुनिया में बदनाम हो चुके पाकिस्तान में परिस्थितियां इतनी विकट हो गई हैं कि वहां अब जिंदा रहना भी किसी जंग से कम नहीं रह गया है. कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद पाकिस्तान को हमारे यहां से जीवनरक्षक दवाओं की सप्लाई बंद की जा चुकी है. जिसके बाद वहां के मरीजों खास तौर पर रैबीज के शिकारों के लिए जिंदगी मुश्किल हो गई है. जबकि पाकिस्तान के सभी बड़े शहरों में कुत्तों के काटने के मामले बढ़ते जा रहे हैं.  

तो क्या कुत्तों के खौफ से भारत के सामने घुटने टेक देगा पाकिस्तान?
भारत का दुश्मन कुत्तों से परेशान

नई दिल्ली: पाकिस्तान की आतंकवाद आधारित और नीतियों ने वहां की जनता के जीवन को संकट में डाल दिया है. पाकिस्तान ने भारत से व्यापारिक संबंध तोड़ने का फैसला तो कर लिया. लेकिन यह फैसला वहां के नागरिकों पर अब भारी पड़ने लगा है. 

जीवनरक्षक दवाओं की हो चुकी है भारी कमी 
भारत से व्यापारिक संबंध टूटने के बाद पाकिस्तान में जीवनरक्षक दवाओं की भारी कमी देखी जा रही है. जिसकी वजह से पाकिस्तान में मरीज बेमौत मारे जा रहे हैं. खास तौर पर वहां एंटी रेबीज और जहर रोधी दवाओं की भारी कमी हो गई है. इन हालातों को देखते हुए 19 अगस्त को पाकिस्तान के उद्योग संगठन एम्पलायर्स फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान (ईएफपी) ने अपनी सरकार से अपील की थी कि भारत से कच्चा माल या तैयार उत्पाद के रूप में आयातित जीवनरक्षक दवाएं बाजार से समाप्त हो चुकी हैं. इसे देखते हुए वैकल्पिक स्रोत की व्यवस्था हो जाने तक आयात में कुछ ढील दी जानी चाहिये. जिसके बाद 3 सितंबर को पाकिस्तान ने अपनी तरफ से जीवनरक्षक दवाओं के आयात की अनुमति दे दी थी. 
लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत विरोधी रवैया नहीं छोड़ा जिसकी वजह से उसे भारत से होने वाली सप्लाई पर भी रोक लग गई. लेकिन अब खबर आई है कि पाकिस्तान के आम लोगों पर इसका बेहद बुरा असर दिखाई दे रहा है. 

दवाओं के लिए भारत पर निर्भर है पाकिस्तान 
आतंकवाद की फैक्ट्री के रुप में पहचाने जाने वाले पाकिस्तान सिर्फ और सिर्फ आतंकियों और जिहादियों के उत्पादन पर ध्यान देता है, जिसकी वजह से वहां के उद्योग धंधे और व्यापार चौपट हो चुके हैं. क्योंकि सरकार का ध्यान उद्योग या अपने देश के विकास पर नहीं होकर आतंकियों के पालन पोषण, लंबी चौड़ी फौज को पालने और भारत से दुश्मनी निभाने पर ज्यादा रहता है. लेकिन पाकिस्तान यह नहीं समझ पाता है कि आपका मकसद चाहे जो भी हो, लेकिन उसके लिए जिंदा रहना जरुरी होता है. 
आज पाकिस्तान में जीवनरक्षक दवाओं की भारी कमी इसलिए है, क्योंकि वहां दवाओं का उत्पादन नहीं होता. इसके लिए वह हमेशा से पूरी तरह भारत पर ही निर्भर रहता है. हालात ऐसे हैं कि कश्मीर पर तनाव बढ़ने से पहले पाकिस्तान ने भारत से 250 करोड़ की एंटी रैबीज और जहररोधी टीके मंगाए थे. लेकिन अब भारत से दुश्मनी मोल लेने के बाद पाकिस्तान में इनकी बुरी तरह किल्लत हो गई है.  

पाकिस्तान के लिए विदेश से दवाएं आयात करना 70 गुना महंगा
भारत से दुश्मनी निभाने वाला पाकिस्तान यूरोपीय या दूसरे देशों से भी दवाएं नहीं मंगा सकता है. क्योंकि यह उसे 70 गुना महंगा पड़ता है. एक जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान में भारत की बजाय दूसरे देशों से वैक्सीन मंगाने का खर्च बहुत ज्यादा है. भारत से आए वैक्सीन की कीमत 1 हजार रुपये है, जबकि यूरोप से आए वैक्सीन की कीमत 70 हजार रुपये पड़ती है.

कुत्तों ने मचा दिया है पाकिस्तान में कहर
भारत से हजार साल तक जंग का दावा करने वाला पाकिस्तान अपने यहां के आवारा कुत्तों से भी नहीं निपट पा रहा है. खबर है कि पाकिस्तान के सिंध और कराची में कुत्तों का भारी आतंक है. वहां लगातार कुत्ते लोगों को काट रहे हैं. जिसकी वजह से रैबीज के मरीजों की संख्या में बहुत ज्यादा इजाफा हुआ है. लेकिन कोढ़ में खाज की तरह जहां रैबीज के मरीज बढ़ रहे हैं वहीं उनके ईलाज के लिए वैक्सीन की जबरदस्त किल्लत है. पाकिस्तान के अस्पतालों में रैबीज के सैकड़ों मरीज हैं, लेकिन उनका ईलाज नहीं कर पाने की वजह से डॉक्टर मजबूर होते जा रहे हैं.  

मदद की आस में तुर्की की तरफ देख रहा है पाकिस्तान
कश्मीर मामले पर पाकिस्तान का साथ सिर्फ तुर्की ने दिया था. जिसके बाद पाकिस्तान जिंदगी हासिल करने के लिए भी तुर्की की तरफ ही देख रहा है. जहां पहले पाकिस्तानी मरीज ईलाज के लिए भारत आ जाते थे, वहीं तनाव बढ़ने के बाद वीजा मिलना मुश्किल हो गया है. जिसके बाद पाकिस्तान ने तुर्की से इसके लिए बात की है. तुर्की के राष्ट्रपति पाकिस्तान दौरे पर आने वाले हैं. पाकिस्तानियों को उम्मीद है कि इस दौरान तुर्की और पाकिस्तान के बीच मेडिकल सुविधाओं को लेकर किसी तरह का ऐलान हो सकता है. 

लेकिन पाकिस्तान की समझ में यह नहीं आ रहा है कि मेडिकल सुविधाओं के मामले में तुर्की उसकी ज्यादा मदद नहीं कर सकता है. क्योंकि दोनो देशों के बीच की दूरी काफी ज्यादा है और तुर्की में अभी भी भारत की तरह मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. लेकिन कश्मीर मसले पर भारत से दुश्मनी ठान चुका पाकिस्तान हर तरह की सचाई से आंख मूंदे हुए है.