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पीएम मोदी के कड़े रुख से झुका चीन, RCEP समझौते के लिए भारत को मनाएगा

प्रधानमंत्री मोदी ने सहमति न बनने पर 16 देशों के साथ होने वाले RCEP समझौते से किनारा कर लिया था. इस समझौते के बारे में विशेषज्ञ पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि भारत के लिए यह समझौता घाटे का रहेगा. हालांकि चीन शिद्दत से चाहता है कि यह समझौता है. खबर आई है कि वह भारत की तरफ से उठाए गए मुद्दों का समाधान करना चाहता है.

पीएम मोदी के कड़े रुख से झुका चीन, RCEP समझौते के लिए भारत को मनाएगा

नई दिल्लीः RCEP समझौते पर सहमति न बन पाने की स्थिति में भारत की ओर से इनकार किया जा चुका है. इसके एक दिन बाद यानी 5 नवंबर को खबर आई है कि भारत से इनकार के बाद चीन इस समझौते की शर्तों पर झुकने के लिए तैयार है. चीन ने मंगलवार को कहा कि वह RCEP (क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी) समझौते में शामिल नहीं होने के मामले में भारत की तरफ से उठाए गए मुद्दों के समाधान की पहल करना चाहता है. इसके लिए वह आपसी समझ और सामंजस्य के सिद्धांत का पालन करेगा. चीन ने यह भी कहा कि वह चाहता है कि भारत समझौते से जल्द जुड़े, इसका वह स्वागत करेगा.

यही बात खटकने वाली है, चीन उतावला क्यों है

इस बात को समझने के लिए हमें चीन की आर्थिक हालत और उसके बाजारों की स्थिति में ताका-झांकी करनी होगी. दरअसल फिलवक्त हाल यह है कि चीन, अमेरिका से घाटा सह रहा है. इन दोनों देशों के बीच जारी ट्रेड वॉर से चीन को बड़ा नुकसान हुआ है. इसी नुकसान की भरपाई चीन RCEP से करना चाहता है.

 चीन की नजर भारत के बाजारों पर है. इस समझौते के तहत फ्री ट्रेड अग्रीमेंट हो जाएगा, जिसके बाद भारतीय बाजारों में चीनी सामान की खेप आने का कोई अनुपात नहीं रह जाएगा. ट्रेड पंडितों की मानें तो उनके आंकड़े कहते हैं कि भारत के बाजार चीनी उत्पादों से भर जाएंगे, लेकिन चीन के बाजारों में भारत इतनी पहुंच नहीं बना पाएगा. चीन और अमेरिका की ट्रेड वॉर बीते साल से जारी है. मार्च 2018 में ट्रंप प्रशासन ने चीन से आयात होने वाले स्टील और एल्युमिनियम पर भारी टैरिफ लगा दिया था. इसके जवाब में तब चीन ने भी अरबों डॉलर के अमेरिकी आयात पर टैरिफ बढ़ा दिया था.

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यह कहा था पीएम मोदी ने

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 देशों के RCEP  समूह के शिखर सम्मेलन में सोमवार को कहा था कि भारत इस समझौते में शामिल नहीं होगा. मोदी ने कहा, RCEP समझौते मौजूदा स्वरूप में उसकी मूल भावना और उसके सिद्धांतों को ठीक तरह से पूरा नहीं करता है. इसमें भारत की ओर से उठाए गए मुद्दों और चिंताओं का भी संतोषजनक समाधान नहीं हुआ है. ऐसी स्थिति में भारत के लिए आरसीईपी समझौते में शामिल न होना ही ठीक है


. इस फैसले को भारत में सराहा गया है. विपक्ष भी RCEP में शामिल होने के विरोध में था. केंद्रीय कृषि मंत्रालय के साथ एसबीआई ने भी इस समझौते पर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं.

कुछ इस तरह पीएम मोदी ने RCEP में शामिल होने से इनकार किया था

क्या है RCEP में समस्या
भारत दूसरे देशों के बाजारों में वस्तुओं की पहुंच के साथ ही घरेलू उद्योगों के हित में सामानों की संरक्षित सूची के मुद्दे को उठाता रहा है. ऐसा माना गया है कि इस समझौते के अमल में आने के बाद चीन के सस्ते कृषि और औद्योगिक उत्पाद भारतीय बाजार में छा जाएंगे. सस्ते चीनी सामान को लेकर चिंता की वजह से भारत के RCEP समझौते से नहीं जुड़ने के बारे में पूछे जाने पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने संवाददाताओं से कहा कि हम भारत के समझौते से जुड़ने का स्वागत करेंगे. उन्होंने कहा, RCEP खुला है. हम भारत की तरफ से उठाए गए मुद्दों के समाधान को लेकर आपसी समझ और सांमजस्य के सिद्धांत का अनुकरण करेंगे. 

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