किश्तवाड़ के चिसोती गांव में बादल फटने से हुई भयावह तबाही के बाद भारतीय सेना ने राहत और बचाव अभियान संभाल लिया है. 17 राष्ट्रीय राइफल्स की पांच टीमों सहित लगभग 300 जवान मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं. अब तक 48 मौतें, 73 लापता और 300 घायल सामने आए हैं.
1/8किश्तवाड़ के चिसोती गांव में गुरुवार दोपहर बादल फटने से भीषण तबाही मची, जिसमें अचानक आए पानी और मलबे ने कई घर, पुल, मंदिर व लंगर बहा दिए. यह इलाका मचैल माता यात्रा मार्ग पर स्थित है, जहां उस समय सैकड़ों श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद थे.
2/8आपदा के तुरंत बाद भारतीय सेना की 17 राष्ट्रीय राइफल्स की पांच टीमें मौके पर पहुंचीं, जिन्होंने बचाव एवं राहत अभियान शुरू किया. जवानों ने मलबे में फंसे लोगों की तलाश, घायलों को प्राथमिक चिकित्सा और लोगों की सुरक्षित निकासी के लिए दिन-रात अभियान चलाया.
3/8भारतीय सेना ने कहा है कि अंतिम व्यक्ति को सुरक्षित निकालने तक अभियान जारी रहेगा. हालांकि कुछ इलाकों में मौसम और पहाड़ी भूगोल चुनौती बने हुए हैं, फिर भी स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में लाई जा रही है. सेना का उद्देश्य अधिकतम जानों की रक्षा और सामान्य स्थिति बहाल करना है.
4/8प्रभावित लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाकर भोजन, पानी व जरूरी सामग्रियां उपलब्ध कराई जा रही हैं. कई परिवारों ने पशु और वाहन खो दिए हैं, जिससे उनकी जीविका पर असर पड़ा है. सेना स्थानीय लोगों को हरसंभव सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रही है.
5/8बचाव अभियान को तेज करने के लिए सेना ने नाले पर अस्थायी पैदल पुल बनाना शुरू किया है, ताकि उपकरणों और राहत टीमों की आवाजाही आसान हो सके. साथ ही मिट्टी हटाने वाली मशीनों के जरिए रास्ते साफ किए जा रहे हैं जिससे फंसे ग्रामीणों तक जल्द पहुंचा जा सके.
6/8करीब 300 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें किश्तवाड़, जम्मू तथा भद्रवाह के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. गंभीर घायलों को सेना के हैलिकॉप्टर और एंबुलेंस के जरिए एयरलिफ्ट किया गया. स्थायी प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा के लिए अतिरिक्त मेडिकल दल भी भेजे गए हैं.
7/8अब तक 48 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 36 की पहचान कर ली गई व 34 शवों को उनके परिजनों को सौंपा गया है. लगभग 73 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश मलबे व आसपास के इलाकों में की जा रही है.
8/8सेना की डेल्टा फोर्स के नेतृत्व में करीब 300 सैनिक राहत कार्यों में लगे हैं, जो नागरिक प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. राहत सामग्री, मेडिकल टीमें और बचाव उपकरण तेजी से घटनास्थल पर भेजे गए.