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Jammu and Kashmir : जम्मू-कश्मीर में देश विरोधी गतिविधियों से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है. NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की विशेष अदालत ने हिजबुल मुजाहिदीन और प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी से जुड़े तीन लोगों और एक ट्रस्ट पर गंभीर आरोप तय किए हैं. इन सभी पर देश में अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए अवैध फंडिंग लेने और उसका इस्तेमाल करने का आरोप है.
अदालत ने अमीर मोहम्मद शम्सी, मुश्ताक अहमद मीर उर्फ जरगर (राजोरी निवासी), अब्दुल हमीद गनई उर्फ फैयाज (शोपियां निवासी), और अल-हुदा एजुकेशनल ट्रस्ट (राजोरी में स्थित) के खिलाफ UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) और भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं.
NIA की जांच के मुताबिक, अमीर शम्सी और अब्दुल गनई ने जमात-ए-इस्लामी के बैन लगने के बावजूद संगठन की गतिविधियों को जारी रखा और फंड जुटाया. जांच में यह भी सामने आया कि अमीर शम्सी को पाकिस्तान में छिपे हिजबुल आतंकी मुश्ताक अहमद मीर से 1.80 लाख रुपये मिले थे. इनमें से एक लाख रुपये अब्दुल गनई को दिए गए, ताकि वह कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा दे सके.
इस केस में आरोपी मुश्ताक मीर अभी भी फरार है और पाकिस्तान में छिपा बैठा है. वहीं, आरोपियों के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है. लेकिन अदालत ने गवाहों के बयानों, दस्तावेजों और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन को गंभीर मानते हुए आरोप तय किए हैं.
यह मामला यह दिखाता है कि कैसे पाकिस्तान से फंडिंग कर, देश में गड़बड़ी फैलाने की कोशिशें जारी हैं. एनआईए अब इस केस की अगली सुनवाई की तैयारी कर रही है.