मिल गया 'मांझी द माउंटेनमैन' जैसा दूसरा किरदार, अपनों के मरने पर कर डाला ये बड़ा काम
शमशान घाट को ऐसी सुंदर जगह में बदल दिया है कि देखने वालों को भरोसा ही नहीं होता कि ये एक शमशान घाट है या कोई आर्ट म्यूजियम.
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अशोक मिश्रा/मलकानगिरी: ओडिशा (Odisha) में मलकानगिरी (Malkangiri) जिले के रहने वाले बंधु नायक ने कूड़े में फेंकी गई प्लास्टिक और पॉलिथीन जैसी बेकार चीजों का इस्तेमाल करके एक शमशान घाट (Creamation Site) को ऐसी सुंदर जगह में बदल दिया है कि देखने वालों को भरोसा ही नहीं होता कि ये एक शमशान घाट है या कोई आर्ट म्यूजियम (Art Museum). हां ये बात बिल्कुल सच है बंधु ने प्लास्टिक की बोतलों, पुराने कपड़ों, पॉलिथीन और टूटे हुए हेलमेट की मदद से ऐसी कलाकृतियां बनाई हैं जिनसे नज़र ही नहीं हटती है और सबसे बड़ी बात बंधु ने ये शमशान घाट को सुंदर बनाने का काम अकेले ही किया है.
आपको बता दें कि बंधु एक बढ़ई (Carpenter) हैं. दुर्भाग्य से उनकी पत्नी और बेटे की मौत हो गई, जिसके बाद से उन्होंने अपना घर छोड़ दिया और तब से वो शमशान पर ही रहते हैं. बंधु को जानने वालों का तो ये तक मानना है कि पत्नी और बेटे के मरने का सदमा बंधु झेल नहीं पाए और उनकी मानसिक स्थिति पूरी तरह से ठीक नहीं है. लेकिन कहने वाले कुछ भी कहें बंधु आज दुनिया में जिंदगी से निराश लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन चुके हैं.
बंधु की स्टोरी बहुत हद तक बिहार के दशरथ मांझी 'मांझी द माउंटेनमैन' से मिलती जुलती है. दशरथ मांझी अपनी पत्नी से बहुत प्यार करते थे. मांझी का गांव बिहार (Bihar) के गया (Gaya) जिले में एक ऐसी जगह था जहां पहाड़ की वजह से शहर जाने का कोई सीधा रास्ता ना होने के कारण बहुत टाइम लगता था. एक बार जब मांझी की पत्नी बीमार पड़ीं तो पहाड़ की वजह से समय पर अस्पताल ना पहुंच पाने के कारण मांझी की पत्नी की मृत्यु हो गई. जिसके बाद मांझी ने अपनी पत्नी की मौत का कारण पहाड़ को मानते हुए अकेले ही पहाड़ को काटकर रास्ता बना दिया था.
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