यहां हनुमान की गदा से होता है रावण का वध संपूर्ण, पाकिस्तान से आई ये अनोखी परंपरा

पाकिस्तान से आई दशहरा मनाने की अनोखी परंपरा   

यहां हनुमान की गदा से होता है रावण का वध संपूर्ण, पाकिस्तान से आई ये अनोखी परंपरा
फाइल फोटो

विपिन शर्मा/ कैथल: त्योहारी सीज़न शुरू हो गया है, हर त्योहार मनाने के कई तरीके देखे जा सकते हैं। दशहरा एक ऐसा पर्व है जो सभी जगह लगभग एक ही तरह से मनाया जाता है। हरियाणा के कैथल में दशहरा मनाने की एक अनोखी परंपरा है। इस परंपरा में कुछ लोग हनुमान जी का रुप धरण करते हैं।

हनुमान का स्वरूप धारण करने वाले 40 दिन क्या करते हैं?

हनुमान जी का भेष बनाने वाले सभी 40 दिन का व्रत रखते हैं। यह लोग घर से बाहर रहते हैं, जमीन पर सोते हैं, केवल एक समय फलाहार करते हैं। दशहरे के दिन इन सभी हनुमान स्वरूपों को पूजा की जाती है। हनुमान जी के स्वरूपों की लंबाई 3 फुट से लेकर 12 फीट तक होती है। इससे बनाने में काफी मेहनत वक्त लगता है।

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समें लोगों की गहरी आस्था भी है। लोगों का मानना है, कि इन 40 दिनों के तप के बाद भगवान हनुमान जी की शक्ति इन स्वरूपों में आ जाती है। दशहरे के दिन लोग इन स्वरूपों को धारण करने वालों को अपने घर बुलाते हैं। घर बुलाकर पूजा की जाती है और मन्नत मानते हैं। कहते हैं है कि ऐसा करने से सभी  मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

पाकिस्तान से कैथल कैसे पहुंची परंपरा?

जानकारों ने बताया कि पाकिस्तान से आई परंपरा एक परिवार लेकर आया था। यह स्वरूप केवल कैथल और पानीपत में ही प्रचलित है। इन स्वरूपों का निर्माण पानीपत में होता है। जो भी इन स्वरूपों का निर्माण करता है। वह खुद भी 40 दिन का व्रत करता है। बड़ी शुद्धता के साथ इनको बनाया जाता है। यह स्वरूप ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते हुए पूरे शहर में घूमते हैं। रावण दहन से पहले अपनी गदा से रावण के शरीर पर प्रहार करते हैं, तब कैथल में रावण दहन होता है।

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