सिंघु बॉर्डर पर रास्ता खुलवाने की सरकार के प्रयासों को झटका, बैठक में नहीं पहुंचे किसान

हाई पावर कमेटी की बैठक में  राई, कुंडली और गन्नौर औद्योगिक क्षेत्रों के अध्यक्षों ने बताया कि कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर रास्ते बंद होने के चलते उद्योगों को बहुत नुकसान हो तरह है.अब तक 50 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक का नुकसान हो चुका है.   

सिंघु बॉर्डर पर रास्ता खुलवाने की सरकार के प्रयासों को झटका, बैठक में नहीं पहुंचे किसान
बैठक में सोनीपत और झज्जर के डिप्टी कमिश्नर के अलावा सोनीपत जिला की राई, कुंडली और गन्नौर औद्योगिक क्षेत्रों के अध्यक्ष शामिल हुए.

राजेश खत्री/सोनीपत : सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) पर दिल्ली का रास्ता खुलवाने के लिए आज दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय मुरथल में हाई पावर कमेटी (High Power Committe) की बैठक हुई. हरियाणा गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) राजीव अरोड़ा ने इस बैठक (Meeting) की अध्यक्षता की. हालांकि इसमें किसान मोर्चा की तरफ से कोई शामिल नहीं हुआ.

बैठक में सोनीपत और झज्जर के डिप्टी कमिश्नर के अलावा सोनीपत जिला की राई, कुंडली और गन्नौर औद्योगिक क्षेत्रों के अध्यक्ष शामिल हुए. प्रशासन ने कहा कि जल्द ही दूसरी बैठक की जाएगी और कोशिश की जाएगी उसमें किसान (Farmers) शामिल हों.

बैठक में प्रशासन ने 43 किसान नेताओं को बुलाया गया था, लेकिन एक भी बैठक में शामिल नहीं हुआ. बैठक में मौजूद राई औद्योगिक क्षेत्र के अध्यक्ष राकेश देवगन, कुंडली औद्योगिक क्षेत्र के अध्यक्ष नीरज चौधरी और गन्नौर एचएसआईडीसी के अध्यक्ष शमशेर शर्मा ने बताया कि कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर रास्ते बंद होने के चलते उद्योगों को बहुत नुकसान हो तरह है.अब तक 50 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक का नुकसान हो चुका है.

सड़कों की मरम्मत की मांग 

प्रशासन से अनुरोध किया है कि एक तरफ का रास्ता जरूर खोला जाए. जब तक रास्ता नहीं खुलता है, अन्य सड़कों की मरम्मत कर उन्हें सही किया जाए ताकि कुछ राहत मिल सके. उनका कहना है कि सरकार द्वारा गठित हाई पावर कमेटी ने जल्द ही जनहित में एक तरफ का रास्ता खुलवाने का आश्वासन दिया है. 

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बैठक में एक भी किसान के नहीं पहुंचने से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर कुंडली सिंघु बॉर्डर से धरनारत किसानों से एक तरफ का रास्ता खुलवाने के सरकार के प्रयासों को झटका लगा है.

बैठक में प्रशासन द्वारा जनहित के मुद्दे पर सरकार का सहयोग करने और दोबारा से बैठक आयोजित करने पर विचार विमर्श किया गया. इस  संबंध में कल कोर्ट में जवाब दाखिल करना है.

दिया आश्वासन 

हरियाणा गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) राजीव अरोड़ा ने बैठक के बाद बताया कि इस बैठक में किसानों को भी बुलवाया गया था पर वे नहीं आए. कुछ उद्योगों से जुड़े यूनियनों के अध्यक्ष जरूर पहुंचे. उन्होंने भी अपनी कुछ समस्याएं रास्तों को लेकर प्रशासन के सामने रखी हैं. जो रास्ते टूट गए हैं, उनकी मरम्मत करवाने का कार्य प्रशासन जरूर करेगा. कोशिश यह रहने वाली है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए रास्ते खुल सकें.

कई बार हो चुकी मांग 

पिछले कई महीनों से पंजाब और हरियाणा से पहुंचे किसान तीन कृषि कानूनों के लेकर केएमपी नेशनल हाईवे से लेकर सोनीपत के कुंडली सिंघु बॉर्डर तक सड़क पर टेंट लगाकर धरना दे रहे हैं.

इस दौरान रास्ता खुलवाने की मांग को लेकर कई बार स्थानीय ग्रामीण प्रशासन से एक तरफ का रास्ता खुलवाने की मांग कर चुके हैं.

इसके बाद याचिकाकर्ता मोनिका अग्रवाल की जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि जनहित में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-44 पर धरनारत किसानों से एक तरफ का मार्ग खुलवाया जाए.