डर छोड़कर किसान करें फलों-सब्जियों और मसालों की खेती, 40 हजार तक का मिलेगा बीमा कवर
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डर छोड़कर किसान करें फलों-सब्जियों और मसालों की खेती, 40 हजार तक का मिलेगा बीमा कवर

हरियाणा सरकार (Haryana Government) ने राज्य के किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें फलों-सब्जियों और मसालों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक अहम फैसला किया है. किसानों के लिए मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना (MBBY) शुरू की गई है.

डर छोड़कर किसान करें फलों-सब्जियों और मसालों की खेती, 40 हजार तक का मिलेगा बीमा कवर

साक्षी शर्मा/चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार (Haryana Government) ने राज्य के किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें फलों-सब्जियों और मसालों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक अहम फैसला किया है. किसानों के लिए मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना (MBBY) शुरू की गई है. योजना के तहत अब 21 तरह के फल, सब्जियों और मसालों की खेती को बीमा कवर मिलेगा.  

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (CM Manohar Lal Khattar) की अध्यक्षता में कल हुई कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) में विशेष रूप से डिजाइन की गई योजना के तहत अजैविक कारकों के खिलाफ बागवानी किसानों (Farmers) को कवर करने का निर्णय लिया गया.

मंत्रिमंडल ने प्रतिकूल मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के कारण बागवानी फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना (MBBY) नामक एक आश्वासन-आधारित योजना के कार्यान्वयन को मंजूरी दे दी. 

दरअसल बागवानी किसानों को अचानक बीमारी फैलने, कीटों के संक्रमण जैसे जैविक कारक और बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, सूखा, पाला, अत्यधिक तापमान जैसे अजैविक कारकों की वजह से हर मौसम में वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है. विभाग ने बागवानी फसलों को कवर करने वाली विभिन्न फसल बीमा योजनाओं की जांच की और पाया कि प्राकृतिक आपदाओं और प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण फसल नुकसान को कवर करने के लिए एक नई योजना की आवश्यकता है.

कुल 21 फसल होंगी कवर 

इस योजना को बागवानी फसल आश्वासन योजना के रूप में तैयार किया गया है. इसका नाम मेरी फसल मेरा ब्योरा (एमबीबीवाई) रखा गया है, जिसका उद्देश्य किसानों को उच्च जोखिम वाली बागवानी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है. योजना के तहत ओलावृष्टि, पाला, वर्षा, बाढ़, आग आदि जैसे मापदंडों को लिया गया है, जिससे फसल को नुकसान होता है.इसमें कुल 21 सब्जी, फल और मसाला फसलों को कवर किया जाएगा. 

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि इस योजना के तहत ओलावृष्टि, पाला, वर्षा, बाढ़ और आग आदि से नुकसान होने पर किसानों की भरपाई की जाएगी.

 

2.5 प्रतिशत प्रीमियम पर मिलेगी सुविधा 

योजना के तहत किसानों को सब्जी और मसाला फसलों के नुकसान होने पर 30 हजार रुपये, जबकि फलों की फसलों पर 40 हजार रुपये बीमा राशि के तौर पर दिए जाएंगे. योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को केवल 2.5 प्रतिशत यानी 750 रुपये और 1000 रुपये ही अदा करने होंगे. 

नुकसान भरपाई के लिए चार श्रेणियां

फसल का नुकसान होने की स्थिति में मुआवजा राशि का दावा सर्वेक्षण और नुकसान की चार श्रेणियों 25, 50, 75 और 100 प्रतिशत की सीमा पर आधारित होगा. यह योजना वैकल्पिक होगी और पूरे राज्य में लागू होगी. 

पंजीकरण कराना जरूरी 

योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल (MFMB Portal) पर अपनी फसल और क्षेत्र का पंजीकरण करते समय इस योजना का विकल्प चुनना होगा.

मौसमवार फसल पंजीकरण की अवधि समय-समय पर निर्धारित और अधिसूचित की जाएगी. यह योजना व्यक्तिगत क्षेत्र पर लागू की जाएगी अर्थात फसल हानि का आकलन क्षेत्र स्तर पर किया जाएगा.

राज्य सरकार इस योजना के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट रखेगी. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत राज्य और जिला स्तरीय समितियां राज्य एवं जिला स्तर पर निगरानी, समीक्षा और विवादों का समाधान करेंगी.

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सहायक जेल अधीक्षक की भर्ती नियम बदले  

कैबिनेट बैठक में सहायक जेल अधीक्षक के रिक्त पदों को भरने के लिए पंजाब जेल विभाग राज्य सेवा (श्रेणी-III कार्यकारी), नियम, 1963 के नियम 15 (1) एवं (2) और परिशिष्ट-क में संशोधन करने के जेल विभाग के एक प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। इन नियमों को अब पंजाब जेल विभाग राज्य सेवा (श्रेणी-III कार्यकारी), हरियाणा संशोधन नियम 2020 कहा जाएगा. 

नियमों में संशोधन करना इसलिए आवश्यक हो गया था, क्योंकि सहायक अधीक्षक जेल के रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार की नवीनतम हिदायतों के अनुसार विभागीय सेवा नियमों में एक विषय के रूप में हिंदी या संस्कृत के साथ दसवीं की शैक्षणिक योग्यता को शामिल करना जरूरी था.

संशोधन के अनुसार, अब सहायक अधीक्षक जेल के पदों को सीधे भरने के लिए शैक्षणिक योग्यता किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी संकाय में स्नातक या समकक्ष होगी. साथ ही हिंदी या संस्कृत के साथ मैट्रिक या उच्चतर शिक्षा होगी. 

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