बारिश बनी किसानों के लिए आफत, देखते ही देखते हरा भरा खेत समंदर में तब्दील
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बारिश बनी किसानों के लिए आफत, देखते ही देखते हरा भरा खेत समंदर में तब्दील

 इस मौसम की बारिश किसानों के लिए लाभदायक है. तो वहीं, कुछ किसानों के लिये बारिश आफत बनकर आई. किसानों की करीब 10 एकड़ गेंहू की फसल बर्बाद हो गई है. खेत के चारों और पानी ही पानी नजर आ रहा है. 

बारिश बनी किसानों के लिए आफत, देखते ही देखते हरा भरा खेत समंदर में तब्दील

पानीपत/राकेश भयाना: इस मौसम की बारिश किसानों के लिए लाभदायक है. तो वहीं, कुछ किसानों के लिये बारिश आफत बनकर आई. किसानों की करीब 10 एकड़ गेंहू की फसल बर्बाद हो गई है. खेत के चारों और पानी ही पानी नजर आ रहा है. बारिश में अक्सर छोटे नाले ओवरफ्लो हो जाते है जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है.

पानीपत के गांव करहंस में बारिश में जोहड़ ओवरफ्लो होने के कारण पानी खेतों में चला गया. गांव में जोहड़ की निकासी नहीं होने के कारण हर साल खेतों में पानी भर जाता है. किसान कई बार प्रशासन से गुहार लगा चुके है. लेकिन, आज तक समस्या को स्थाई समाधान नहीं निकला है. पानीपत में लगातार भारी बारिश से किसानों का सोना नष्ट हो गया है.

क्योंकि पानीपत के गांव करहंस में किसानों के लिए बारिश बर्बादी बनकर आई है. कई दिन से हो रही बारिश के चलते गांव करहंस का जोहड़ ओवरफ्लो हो गया और बीती रात बारिश से जोहड़ टूट गया जिससे सारा पानी खेतो में खड़ी फसल में भर गया. देखते ही देखते किसान का हरा भरा खेत समंदर में तब्दील हो गया.

पीड़ित किसान रणधीर व रेखा ने बताया की जोहड़ का सारा पानी उनके खेत में भर गया है जिससे उनकी करीब 9 एकड़ फसल बर्बाद हो गई है।वही एक महिला किसान की 3 एकड़ फसल जलमग्न होने से बर्बाद हो गई. किसान ने बताया की जोहड़ के पानी की निकासी के लिए पाइपलाइन दबा रखी है. लेकिन, ठेकेदार की लापरवाही कि वजह से पाइप लाइन जाम रहती है.

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उन्होंने आगे कहा कि क्योंकि ठेकेदार द्वारा पाइपलाइन की सफाई नहीं करवाई जाती जिसका खामियाजा हर साल किसानों को भुगतना पड़ता है. बीती रात भी यही हुआ जब जोहड़  के ओवरफ्लो पानी की निकासी पाइप के जरिये नहीं हुई तो सारा पानी टूटकर खेतो में भर गया. हर साल इस बर्बादी के बारे कई बार जिला प्रशासन को शिकायत दे चुके है. लेकिन, कही कोई सुनवाई नहीं होती.

किसानों ने कहा कि पीड़ित किसान ने सरकार और जिला प्रशासन से फसल नुकसान के मुआवजे की मांग की है. गौरतलब है कि गेंहू की फसल की बुवाई का समय निकल जाने की वजह से अब किसान दोबारा से अपनी फसल की बुवाई भी नहीं कर सकता है जिसकी वजह से अब किसान अब न घर का रहा ना घाट का. बहरहाल किसान के नुकसान होने से गांव के लोग ढांढस बंधा रहे है. बता दे कि अभी तक जिला प्रशासन की तरफ से कोई भी सरकारी नुमाइंदा नुकसान का जायजा लेने नहीं पहुंचा है.

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