किसान आंदोलन से चरमराए उद्योगों और यातायात व्यवस्था पर NHRC ने हरियाणा से मांगी रिपोर्ट

देश में तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन को करीब 10 महीने हो चुके हैं. NHRC ने हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकार के चीफ सेक्रेटरी, इन राज्यों के डीजीपी, दिल्ली सरकार और पुलिस कमिश्नर से किसानों के विरोध प्रदर्शन की रिपोर्ट मांगी है.

किसान आंदोलन से चरमराए उद्योगों और यातायात व्यवस्था पर NHRC ने हरियाणा से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली : देश में तीन कृषि कानूनों (Agriculture Laws) के विरोध में किसानों के आंदोलन (Kisan Andolan) को करीब 10 महीने हो चुके हैं. आंदोलनों की वजह से दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में सूक्ष्म, माध्यम और बड़ी कंपनियों समेत 9000 से ज्यादा उद्योगों पर बुरा असर पड़ा है.

इसके अलावा यातायात व्यवस्था चरमरा गई है, जिसकी वजह से मरीजों,बुजुर्गों और दिव्यांगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. साथ ही सीमाएं बंद होने की कारण लोगों को यात्रा के लिए ज्यादा दूरी तय करनी पड़ रही है.

इस तरह की शिकायतों को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गंभीरता से लिया है. NHRC ने हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकार के चीफ सेक्रेटरी, इन राज्यों के डीजीपी, दिल्ली सरकार और पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किया है. आयोग ने इन पक्षों से किसानों के विरोध प्रदर्शन की रिपोर्ट मांगी है.

दरअसल राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को यह भी शिकायत मिली है कि किसान आंदोलन की वजह से कुछ जगहों पर लोगों को  उनके घरों से भी नहीं निकलने दिया जा रहा हैं. इसके अलावा आंदोलन स्थलों पर कोविड प्रोटोकॉल (Covid Protocol) की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.

10 अक्तूबर तक रिपोर्ट मांगी

राज्य सरकारों और और इनके अधिकारियों को नोटिस देने के अलावा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने आर्थिक विकास संस्थान से भी 10 अक्तूबर तक इस आंदोलन की वजह से उद्योगों पर पड़े प्रभाव को लेकर एक रिपोर्ट मांगी है. साथ ही आयोग ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और गृह मंत्रालय (Home Ministry) से इस आंदोलन में हो रहे कोविड नियमो के उल्लंघन पर भी रिपोर्ट मांगी है.

गैंगरेप मामले में झज्जर के डीएम तलब 

मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि प्रदर्शन स्थल पर एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में झज्जर के डीएम से मृतक के परिजन को मुआवजे के भुगतान के संबंध में कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई थी,  इसलिए झज्जर के डीएम 10 अक्टूबर तक रिपोर्ट दाखिल करें. 

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सर्वे के लिए टीम बनाएं 

आयोग ने आगे कहा कि दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क और दिल्ली विश्वविद्यालय से अनुरोध है कि वे सर्वेक्षण करने के लिए टीमों की प्रतिनियुक्ति करें और एक रिपोर्ट प्रस्तुत करें, जिसमें किसानों द्वारा लंबे समय तक आंदोलन के कारण आजीविका, जीवन, वृद्ध और दुर्बल व्यक्तियों पर इसके प्रभाव का आकलन हो सके. 

पिछले साल 25 नवंबर से विभिन्न राज्यों के किसान दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, दिल्ली-उत्तर प्रदेश के गाजीपुर बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और तीन नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर अपना डेरा डाले हुए हैं.