कोरोना पर 'आस्था' भारी, कान्हा के श्रृंगार के लिए सज गए बाजार

जन्माष्टमी की पावन बेला पर भगवान श्री कृष्ण को लड्डू गोपाल के रूप में पूजा जाता है उनका श्रृंगार किया जाता है उन्हें झूला झूलाया जाता है.

कोरोना पर 'आस्था' भारी, कान्हा के श्रृंगार के लिए सज गए बाजार
कोरोना पर 'आस्था' भारी, कान्हा के श्रृंगार के लिए सज गए बाजार

परमवीर ऋषि/ अमृतसर : जन्माष्टमी पर कोरोना का साया जरूर है, लेकिन कोरोना भक्तों की आस्था और विश्वास को कम नहीं कर पाया है.यही वजह  है श्रद्धालु लडडू गोपाल के श्रृंगार उनके आसन और वस्त्रों के लिए बाजार का रूख कर रहे हैं.जन्माष्टमी की पावन बेला पर भगवान श्री कृष्ण को लड्डू गोपाल के रूप में पूजा जाता है उनका श्रृंगार किया जाता है उन्हें झूला झूलाया जाता है.

लड्डू गोपाल को घर में स्थापित करने वाले श्रद्धालु जन्माष्टमी के मौके पर उनका श्रृंगार करने के लिए बाजार का रुख कर रहे हैं. हालांकि कोरोना के चलते इस बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी की रौनक थोड़ी फिकी जरूर है.लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था पर कोरोना पर भारी पड़ रही है.

कोरोना के चलते इस बार बाजार में वृंदावन और मथुरा से आने वाले सामान की थोड़ी कमी जरूर है लेकिन इस कमी को लोकल कारीगरों ने पूरा कर दिया है.अमृतसर के कारीगरों ने लड्डू गोपाल के आसन और वस्त्र तैयार किये हैं.जिन्हें लोग काफी पसंद कर रहे हैं. कुछ श्रद्धालु ऐसे भी हैं जो लड्डू गोपाल का दोबारा से श्रृंगार करने के लिए कारीगरों का रूख कर रहे हैं.

कोरोना संकट में श्रद्धालुओं की आस्था कोरोना पर भारी पड़ रही है. सांवरे का अंदाज सबसे निराला है, वैसे ही कान्हा के भक्तों की भक्ति भी निराली है.अपने बांके बिहारी की भक्ति करने से उन्हें कोई भी नहीं रोक सकता.यही वजह है कि महामारी काल में जहां हर तरह के सामूहिक कार्यक्रमों पर रोक लगी हुई है. दूसरी ओर कान्हा की भक्ति महामारी पर भारी पड़ेगी.कान्हा अपने भक्तों के घर पर विराजेंगे और घर घर उनकी पूजा अर्चना की जाएगी.

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