जन्नत का अहसास कराती सफेद वादियां जब बनती है जानलेवा

क्या हिमस्खलन से बचा जा सकता है?

जन्नत का अहसास कराती सफेद वादियां जब बनती है जानलेवा
जन्नत का अहसास कराती सफेद वादियां जब बनती है जानलेवा

मनाली: सफेद बर्फ की चादर से ढके पहाड़ सभी को अपनी ओर आकर्षित करते है.. जब ऊंची चोटियों पर रुई के फाहो सी बर्फ गिरती है तो वो पल अपने आप में बेहद खूबसूरत होता है.. और बर्फबारी के बाद सफेद चादर में लिपटी वादियां मंत्रमुग्ध कर देती है। अगर आप उस पल का गवाह बनते हैं  तो आपको अहसास होता है मानों आप जन्नत में हो.. लेकिन एक पल में ही तस्वीर बदल सकती है और यही बर्फ की वादियां आपकी जान पर आफत बरपा सकती है. बात हो रही है हिमस्खलन की.

स्नो एंड एवलांच रेस्क्यू ट्रेनिंग प्रोग्राम 

हर साल बर्फबारी के दौरान आने वाला हिमस्खलन कब-कब दस्तक देगा, इसका ठीक अनुमान लगाना मुमकिन नहीं है, मगर हिमस्खलन से  बचने और इसके आने के बाद क्या किया जा सकता है अगर इसकी जानकारी हो तो बहुत बड़ा नुकसान रोका जा सकता है। हिमाचल प्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से पहली बार स्नो एंड एवलांच रेस्क्यू ट्रेनिंग प्रोग्राम रखा गया, जिसमें प्रदेश भर से 30 लोग प्रशिक्षण ले रहे हैं, पहले दल में चंबा, कुल्लू, किन्नौर से पुलिस और होम गार्ड के जवान शामिल हुए हैं, जबकि दूसरे दल में स्थानीय युवा हैं, तीन दिनों तक चलने वाले इस ट्रेनिंग प्रोग्राम को कुल्लू ज़िला प्रशासन की देखरेख में पूरा किया जा रहा है। SASE अमूमन भारतीय सेना को हिमस्खलन से निपटने का प्रशिक्षण देती है...लेकिन पहली बार वो भी हिमाचल सरकार के इस कार्यक्रम में शामिल हुए हैं।रेस्क्यू ट्रेनिंग प्रोग्राम के ज़रिए प्रदेश के बर्फ़बारी वाले इलाकों में क्विक रिस्पॉन्स टीम की तैनाती की जाएगी। मनाली के DRDO के विंग स्नो एंड एवलांच स्टडी संस्थान के वैज्ञानिक इन्हें प्रशिक्षण दे रहे हैं।ट्रेनिंग ले रहे युवाओं ने बताया कि पहली बार उन्हें इस तरह का प्रशिक्षण हासिल करने का मौका मिला है, जो भविष्य में काफी मददगार साबित होगा

क्या होता है हिमस्खलन

हर साल सैकड़ों लोगों की जान लेने वाला हिमस्खलन अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को तबाह कर देता है. अधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में जब ऊंची चोटियों पर परत दर परत बर्फ जमने के बाद एका एक जब तापमान बढ़ जाता है या भारी हिमपात होता है और बहुत ज्यादा दबाव बढ़ने की वजह से ये परतें खिसक जाती हैं तो ये तेज बहाव के साथ नीचे की ओर बहने लगती हैं इसे ही हिमस्खलन कहते है. आज मनुष्य अपने निजी स्वार्थ के लिए जंगलो, मैदानों, पहाड़ो, खनिज पदार्थो का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहा है और इसी के परिणाम स्वरुप प्राकृतिक आपदायें आने लगी है. अब यही प्राकृतिक आपदायें मनुष्य के अस्तित्व के लिए चुनौती बन गई है