क्या OP चौटाला के तीसरे मोर्चे के गठन से हरियाणा की राजनीति पर पड़ेगा कोई असर? जानें

हरियाणा के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके ओमप्रकाश चौटाला एक बार फिर तीसरे मोर्चे की तैयारियों में लगे हुए हैं. 

क्या OP चौटाला के तीसरे मोर्चे के गठन से हरियाणा की राजनीति पर पड़ेगा कोई असर? जानें

हिसार: हरियाणा के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके ओमप्रकाश चौटाला एक बार फिर तीसरे मोर्चे की तैयारियों में लगे हुए हैं. इस मौर्चे के लिए वो सरदार प्रकाश सिंह बादल, शरद पवार, ममता बनर्जी और मुलायम सिंह यादव आदि नेताओं से वह भेंट करेंगे. इतना ही नहीं ओमप्रकाश चौटाला दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और बसपा सुप्रीमो मायावती को भी तीसरे मोर्चे से जोड़ना चाहते हैं.

बता दें कि ओमप्रकाश चौटाला भले ही तीसरी मौर्चे की तैयारियों में लगे हुए है, लेकिन इस मोर्चे का हरियाणा की राजनीति पर कोई असर पड़ेगा. ऐसी कोई भी संभावना दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही है. क्योंकि जिन दलों को चौटाला मौर्चे में शामिल करना चाहते हैं, वो सब क्षेत्रीय दल हैं और अपने-अपने प्रदेशों तक ही सीमित हैं. चौटाला के अपने दल का हरियाणा में आधार अवश्य है.

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लेकिन, किसी और दल को साथ लेने से कोई लाभ नहीं मिलेगा. वह जो कुछ भी हरियाणा में हासिल करेंगे अपने जनाधार से ही कर पाएंगे. बताते चले कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल के शिरोमणि अकाली दल से पहले भी कई बार इनोलो के दल से गठबंधन हो चुका है और इनेलो अपने प्रभाव क्षेत्र वाली एक दो सीटें शिअद को देकर बादल को अनुगृहीत करता था.

इसका बड़ा कारण बादल और चौटाला परिवारों में मित्रता भी थी. बात साफ है चौटाला जिस तरह से शिअद को अनुगृहीत करते थे. उस तरह से बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी को तो कर नहीं सकते और अगर ऐसा करते हैं तो अपने लिए क्या रखेंगे. हो सकता है कि एक या फिर दो सीटें मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी मांग ले, क्योंकि कभी उसके भी एक विधायक होते थे और बसपा से इनेलो का समझौता होता रहा और टूटता रहा है.

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लेकिन, ताजुब की बात दोनों मिलकर भी कोई कमाल नहीं दिखा पाए. तो दूसरी तरफ बड़ा सवाल ये भी खड़ा होता है कि कांग्रेस तीसरे मोर्चे में शामिल होती या फिर नहीं और अगर शामिल होती है तो वह हरियाणा में मुख्यमंत्री पर पर अपनी दावेदारी जरूर करेगी और यह चौटाला को नागवारा होगा. इसलिए तीसरे मोर्चे के गठन से हरियाणा की राजनीति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला.

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