शिव के मनभावन सावन की हुई शुरूआत, इस विधि-विधान के साथ करें पूजा, इन बातों का रखें खास ख्याल

हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और सबसे पवित्र माह सावन 25 जुलाई से शुरू हो चुका है. सावन के महीने में शिव की पूजा, उपासना और अभिषेक से सभी मनोकामना पूर्ण होती है

शिव के मनभावन सावन की हुई शुरूआत, इस विधि-विधान के साथ करें पूजा, इन बातों का रखें खास ख्याल

नई दिल्ली: हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और सबसे पवित्र माह सावन 25 जुलाई से शुरू हो चुका है. सावन के महीने में शिव की पूजा, उपासना और अभिषेक से सभी मनोकामना पूर्ण होती है. कहते हैं कि मन में भक्ति, शक्ति,  पवित्रता, साधना और अध्यात्म हो तो मन स्वयं को शिवभक्ति में समाहित करने लगता है.

सावन माह में शिव का पूजन कैसे करें

सावन के महीने में पवित्रता पूर्ण जीवन यापित करें. इसी के साथ ॐ नम: शिवाय मंत्र का जाप भी करें. इसके बाद शिवलिंग का गंगाजल और गाय के दूध से अभिषेक करें. फल-फूल, बिल्वपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्रियों से शिव के मंदिर को सजाएं. इसके बाद ही शिव की महाआरती करें.

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पहली बार श्रावण मास की शुरुआत रविवार से हो रही है और समाप्ति भी रविवार को हो रही है, जो बेहद खास है.  प्रतिपदा को श्रवण नक्षत्र का संयोग चार चांद लगाने वाला होगा। सावन में नवग्रह पूजन विशेष फलदायी होता है।

इन बातों का रखें खास ध्यान

संत समाज को वस्त्र, दूध, दही, पंचामृत, अन्न, फल का दान करें.

स्कंदपुराण के अनुसार सावन माह में एक समय भोजन करना चाहिए.

पानी में बिल्वपत्र या आंवला डालकर स्नान करने से पाप का क्षय होता है.

भगवान विष्णु का वास जल में है. इस माह तीर्थ के जल से स्नान का विशेष महत्व है.

शास्त्रों के अनुसार काशी में इसकी महिमा इसलिए मानी जाती है क्योंकि द्वादश ज्योतिर्लिंग में सर्वप्रधान ज्योतिर्लिंग आदि विशेश्वर को माना जाता है. भगवान आशुतोष के दो रूप हैं. एक रौद्र तो दूसरा आशुतोष. इन्हें प्रसन्न करने के लिए सावन में रुद्राभिषेक, तैलाभिषेक, जलाभिषेक किया जाता है.

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