ये सरकारी स्कूल अब निजी स्कूल से कम नहीं, कायापलट के पीछे का सच क्या है, जानिए

अंबाला के जनसुई सरकारी स्कूल का कायापलट हो गया है। अब ये सरकारी स्कूल किसी निजी स्कूल से कम नहीं दिखता, लेकिन इसके पीछे स्कूल की प्रिंसीपल और ग्रामीणों की कड़ी मेहनत है।

ये सरकारी स्कूल अब निजी स्कूल से कम नहीं, कायापलट के पीछे का सच क्या है, जानिए
सरकारी स्कूल किसी निजी स्कूल से कम नहीं दिखता, लेकिन इसके पीछे स्कूल की प्रिंसीपल और ग्रामीणों की कड़ी मेहनत है

अंबाला/अमन कपूर: अंबाला के जनसुई का सरकारी स्कूल अब चमक उठा है लेकिन पहले यहां न तो ना तो बाग बगीचे थे, ना ऐसी खूबसूरत दीवारें और ना ही कोई खास सुविधा। आलम तो ये था कि स्कूल की हालत को देखकर कोई बुलाने पर भी नहीं आता था। लेकिन फिर स्कूल की कार्यवाहक प्रिंसिपल और ग्रामीणों की मेहनत रंग लाई और शिक्षा का ये मंदिर एक बार फिर से जी उठा है। इस स्कूल में अब बच्चों के लिए लाइब्रेरी की भी सुविधा है। स्कूल में सुंदर पार्क है और स्कूल की खूबसूरती को चार चांद लगाती पेंट की गई दीवारें हैं।

चंदा इक्ट्ठा कर किया गया कायापलट
स्कूल में नई प्रिंसिपल मीना सब्रभाल ने जब स्कूल की हालत देखी तो दंग रह गई।  बड़ी बात तो ये है कि कोरोना काल में इस स्कूल की ग्रांट तक वापिस चली गई थी। लेकिन अध्यापकों और यहां के ग्रामीणों के हौंसले बुलंद थे। लिहाजा हर किसी ने दिल खोल पर अपनी तरफ से स्कूल के लिए चंदा दिया और स्कूल की दशा और दिशा बदल कर रख दी। स्कूल की प्रिंसिपल ने 7 लाख रुपये लगाए और 6 लाख रुपये गांव के लोगों ने इकठ्ठा करके स्कूल की काया ही बदल दी।

पहले स्कूल के नाम पर था जंगल
प्रिंसिपल की मानें तो स्कूल के नाम पर केवल जंगल ही था। लेकिन धीरे धीरे स्कूल की दशा सुधारने का काम शुरू किया गया। गांव वालों को बुलाकर पहले उनसे बात की गई और गांव के लोगों के साथ उसके पूरे स्टाफ ने मिलकर शुरुआत की  और स्कूल की काया ही बदल दी अब ये स्कूल किसी निजी स्कूल से कम नहीं है।

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