सरकार की बेरुखी का शिकार ये हॉकी प्लेयर दो वक्त की रोटी के लिए सिल रहा है जूते, अनुराग ठाकुर से उम्मीद

हिमाचल प्रदेश हॉकी टीम का आठ बार राष्ट्रीय खेलों में प्रतिनिधित्व कर चुके खिलाड़ी ने अपने हालात देखते हुए अपने बच्चों को भी खेलों से दूर ही रखा है.

सरकार की बेरुखी का शिकार ये हॉकी प्लेयर दो वक्त की रोटी के लिए सिल रहा है जूते, अनुराग ठाकुर से उम्मीद
सुभाष चंद हिमाचल प्रदेश हॉकी टीम का आठ बार राष्ट्रीय खेलों में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं

अरविंदर सिंह/हमीरपुर : टोक्यो में चल रहे ओलंपिक खेलों में पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने अच्छा प्रदर्शन कर हॉकी खेल प्रेमियों का उत्साह को बढ़ाया, लेकिन हिमाचल में रोजी रोटी के लिए एक खिलाड़ी की जद्दोजहद देखने के बाद मन में ये सवाल उठता है कि जो खिलाड़ी देश के लिए जी जान से खेलते हैं, क्या सरकार की जिम्मेदारी उन्हें कुछ उपहार या बधाइयां देने से खत्म हो जाती है.  

हिमाचल प्रदेश हॉकी टीम का आठ बार राष्ट्रीय खेलों में प्रतिनिधित्व कर चुके एक खिलाड़ी जूते सिलकर अपनी रोजी-रोटी चला रहा है. सरकार से इसे इसके बदले कुछ नहीं मिला.

में अब भी हॉकी के प्रति जज्बा रखने वाले सुभाष चंद ने उम्मीद जताई है कि केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर उनके परिवार के हालात को देखते हुए उनके बेटे के रोजगार के लिए कोई सहायता जरूर करेंगे. 

केंद्रीय युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के गृह जिले हमीरपुर में 90 के दशक में आठ बार विभिन्न वर्गों में नेशनल खेल चुके सुभाष चंद जिला मुख्यालय हमीरपुर के मुख्य बाजार में जूतों की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं.

बच्चों को खेलों से दूर ही रखा 

सरकार की बेरुखी का शिकार सुभाष अब खेलना छोड़ चुके हैं और अपने हालात देखते हुए अपने बच्चों को भी खेलों से दूर ही रखा है.

सुभाष चंद हॉकी की टीम में बतौर गोलकीपर खेला करते थे और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के दौरान पंजाब टीम के कप्तान परगट सिंह, सुरजीत सिंह आदि के खिलाफ खेल चुके हैं. सुभाष चंद ने अपने समय को याद करते हुए कहा कि उस समय हॉकी में बहुत अधिक सुविधाएं न होने के बावजूद खिलाड़ियों का खेल प्रेम पूरे जोश में होता था. उन्होंने खुशी भी जताई कि आज खेल में हालात अच्छे हैं 

नौकरी की मांग नहीं सुनी गई 

पूर्व प्रदेश हॉकी की टीम खिलाड़ी ने कहा कि उनका तो अब समय निकल गया है, लेकिन उम्मीद है कि उनके बेटे के लिए कुछ न कुछ सरकार करेगी. इससे पहले भी कई मंचों पर सुभाष चंद के लिए नौकरी की कई सामाजिक संगठन मांग उठा चुके हैं, लेकिन कहीं भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई.

सरकार कोई फैसला ले

सुभाष का कहना है कि अनुराग ठाकुर अब खेल मंत्री बने हैं तो थोड़ी उम्मीद जगी है. उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के भविष्य को देखकर सरकार को कोई फैसला लेना चाहिए, ताकि खेलों के बाद उनके परिवार को दिक्कतों का सामना न करना पड़े. 

सुभाष के बेटे आशीष ने कहा कि खेलों के बाद सरकार की बेरुखी के चलते परिवार ने उन्हें खेलों से दूर रहने को कहा. उन्होंने कहा कि अपने पिता के फैसले के बाद उन्होने इस ओर ध्यान नहीं दिया और होटल मैनेजमेट विषय में अपनी पढ़ाई पूरी की.