जानवर हूं तो क्या हुआ, किसी की मौत पर दुख मुझे भी होता है

मोगा के एक गांव में एक लावारिस कुत्ता चर्चा का विषय बना हुआ है. जब भी किसी की मौत होती है तो यह कुत्ता अंतिम संस्कार में शरीक होकर दुख बांटता है. यहां तक जब मृत्यु भोज होता है तो वहां भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है. 

जानवर हूं तो क्या हुआ, किसी की मौत पर दुख मुझे भी होता है
ग्रामीणों के दुख में शामिल होने के अलावा यह कुत्ता सुबह जब गुरुद्वारा साहिब खुलता है तो वहां जाकर बैठ जाता है और पाठ खत्म होने तक मौजूद रहता है

नवदीप सिंह/ मोगा : अक्सर आपने लोगों को कहते हुए सुना होगा कि जानवर हो क्या, कोई फीलिंग है कि नहीं, लेकिन मोगा में एक लावारिस कुत्ते के मानवीय गुणों को देखकर लोग हैरान हैं. 

मोगा के गांव बंबीहा भाई में जब भी किसी की मौत होती है तो यह कुत्ता अंतिम संस्कार में शरीक होकर दुख बांटता है. यहां तक जब मृत्यु भोज होता है तो वहां भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है. जी हां, इस समय आप अपनी स्क्रीन पर जिस कुत्ते की तस्वीर देख रहे हैं, यह वही कुत्ता है. यह कुत्ता आजकल मोगा जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है.

गुरुद्वारे में आकर सुनता है पाठ 

गांव के गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथी ने बताया कि यह कुत्ता आम कुत्तों की तरह नहीं है. सुबह के समय जब गुरुद्वारा साहिब खुलता है तो यह आकर बैठ जाता है और जब गुरुद्वारा साहिब में सुबह का पाठ खत्म हो जाता है तो यह चला जाता है. उन्होंने कहा कि जब गांव में कोई बुरी घटना घटती है तो यह कुत्ता खुद ब खुद उनके घर पहुंच जाता है. 

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ग्रामीणों ने अब जाकर दिया ध्यान 

ग्रामीणों ने बताया कि जिस घर में मौत हो जाती थी तो कुत्ता खुद-ब-खुद उस घर पर पहुंच जाता था और मौत से लेकर मृत्युभोज तक दुखी परिवार के साथ खड़ा रहता था, लेकिन हमने इससे पहले कभी ध्यान ही नहीं दिया था कि यह लावारिस कुत्ता किसी के दुख में भी शरीक हो सकता है.

किसी की मौत पर कुत्ते के शामिल होने से ऐसा महसूस होता है कि जैसे वह यह समझाने की कोशिश कर रहा हो कि जानवर हूं तो क्या हुआ, किसी की मौत पर दुख मुझे भी होता है.