गुरुग्राम में एंबिएंस मॉल के मालिक राज सिंह गहलोत, इस एक पीआईएल से बिगाड़ा सारा "खेल"

गहलोत पर 200 करोड़ रुपये के बैंक कर्ज की धोखाधड़ी का आरोप है. ये भी आरोप है कि फर्जीवाड़े को अंजाम देकर उन्होंने लोगों के लिए बनने वाले आवासीय परिसर की जमीन पर गुरुग्राम के बेहद पॉश इलाके में व्यावसयिक निर्माण करवाया और वहां एम्बियंस मॉल का निर्माण करवा दिया. 

गुरुग्राम में एंबिएंस मॉल के मालिक राज सिंह गहलोत, इस एक पीआईएल से बिगाड़ा सारा "खेल"
गहलोत पर आरोप है कि उन्होंने लोगों के लिए बनने वाले आवासीय परिसर की जमीन पर गुरुग्राम के बेहद पॉश इलाके में एम्बियंस मॉल का निर्माण करवा दिया.

नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बैंक धोखाधड़ी मामले में गुरुग्राम के एंबिएंस मॉल (Ambience Mall) के मालिक राज सिंह गहलोत (Raj Singh Gehlot) को गिरफ्तार कर लिया है. गहलोत पर 200 करोड़ रुपये के बैंक कर्ज की धोखाधड़ी का आरोप है. उन्हें गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया. 

ईडी मुख्यालय की टीम ने राज सिंह गहलोत को कई बार पूछताछ और मामले की जांच के बाद गिरफ्तार कर लिया. गहलोत पर ये भी आरोप है कि फर्जीवाड़े को अंजाम देकर उन्होंने लोगों के लिए बनने वाले आवासीय परिसर की जमीन पर गुरुग्राम के बेहद पॉश इलाके में व्यावसयिक निर्माण करवाया और वहां एम्बियंस मॉल का निर्माण करवा दिया. 

CBI भी गहलोत के खिलाफ जांच कर रही है. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने CBI को गुरुग्राम में लगभग 18.98 एकड़ भूमि पर एक कमर्शियल बिल्डिंग के कथित अवैध निर्माण के मामले की जांच करने का निर्देश दिया था. 

पिछले साल हुई थी छापेमारी

CBI ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर गहलोत, एंबिएंस लिमिटेड व एंबिएंस डेवलपर्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड और हुडा, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अज्ञात अधिकारियों और अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. ईडी और CBI ने पिछले साल गहलोत के कई ठिकानों पर छापेमारी भी की थी.

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सीबीआई के बाद ईडी की कार्रवाई 

CBI ने राज सिंह गहलोत और उनकी कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया था. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई के बाद ईडी की टीम ने जब गहलोत के ठिकानों पर छापेमारी की तब कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और सबूत हाथ लगे. उसी के आधार पर जब कई बार पूछताछ की गई तो राज सिंह गहलोत का झूठ पकड़ा गया. इसी के बाद ईडी की टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. 

ईडी द्वारा दर्ज मामले के मुताबिक दिल्ली -जयपुर नेशनल हाईवे के पास आवासीय परिसर के लिए 19 एकड़  जमीन का आवंटन किया गया था. लेकिन राज सिंह गहलोत ने मात्र 7.9 एकड़ जमीन पर आवासीय परिसर का निर्माण किया. बाकी बची जमीन पर मुनाफा कमाने के लिए उस जमीन पर गलत तरीके से मॉल और अन्य दूसरी कमर्शियल बिल्डिंग बनवा दी, जिसका फायदा उन्हें व्यक्तिगत तौर पर हुआ.

जब इस मामले में एक जनहित याचिका (PIL ) दायर की गई तो ये तमाम फर्जीवाड़ा सबके सामने आया. ईडी के अनुसार, एक होटल परियोजना के लिए बैंकों से लिए गए ₹800 करोड़ से अधिक के कर्ज का एक बड़ा हिस्सा डायवर्ट कर खपाया गया.