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Zee SalaamCelebrity ZEE Salaamक्या मोहम्मद रफ़ी ने सच में मस्जिद में झाड़ू लगाकर कमाए पैसे से किया था हज?

क्या मोहम्मद रफ़ी ने सच में मस्जिद में झाड़ू लगाकर कमाए पैसे से किया था हज?

Mohammed Rafi Birthday: आज मोहम्मद रफी का जन्मदिन है और इस मौके पर हम आपको उस किस्से के बारे में बताने वाले हैं जब फेमस सिंगर ने गाने गाना छोड़ने का फैसला किया था. उन्होंने ऐसा हज के दौरान किया था.

क्या मोहम्मद रफ़ी ने सच में मस्जिद में झाड़ू लगाकर कमाए पैसे से किया था हज?

Mohammed Rafi Birthday: मोहम्मद रफी हिंदुस्तान के उन दिग्गज सिंगर्स में शुमार होते हैं, जिन्होंने अपनी आवाज़ से पूरे मुल्क का मनोरंजन किया. उनके ज़रिए गाए गए गाने इतना मशहूर हुए कि आज भी गली, मोहल्लों, बसों, कारों और चाय की टपरियों में बजते हुए सुने जा सकते हैं. मोहम्मद रफी ने 7 हज़ार से ज्यादा गाने गाए, लेकिन उनकी ज़िंदगी में एक ऐसा वक्त भी आया जब उन्होंने गानों से संन्यास लेने का फैसला कर लिया था. आइये जानते हैं उनकी ज़िन्दगी से जुड़े कुछ अनछुए पहलु के बारे में. 

हज के बाद छोड़ दिया था गाना

मोहम्मद रफी का जन्म 24 दिसंबर 1924 को लाहौर में हुआ था. साल 1944 में वह मुंबई में शिफ्ट हो गए और फिर वहीं बस गए. ऐसा कहा जाता है कि मोहम्मद रफी ने हज के बाद गानों को हमेशा के लिए अलविदा करने का फैसला कर दिया था. उन्होंने फैसला किया था कि वह कभी गाना नहीं गाएंगे. इसके पीछे वजह इस्लामिक बताई जाती है, क्योंकि इस्लाम में म्यूजिक को हराम करार दिया गया है.

ये भी कहा जाता है कि रफ़ी साहब जब हज पर जाने की इच्छा जताई थी तो, उहने उलेमा ने सलाह दी थी कि आप का हज कबूल नहीं होगा क्यूंकि आपका पैसा म्यूजिक से कमाया हुआ पैसा है. इसलिए आपको किसी जायज कमाई के पैसा से हज करने जाना चाहिए. ऐसी चर्चाएँ थी कि उलेमा की इस राय के बाद रफ़ी साहब से एक मस्जिद में पैसे लेकर झाड़ू लगाने का काम किया था, और जब हज के पैसे पूरे हो गए तो उन्होंने उस पैसे से हज किया. हालांकि, इस बात की कभी खुद रफ़ी साहब या उनके गुजरने के बाद उनके घर वालों ने कभी सार्वजनिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की. 

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हज के दौरान मिले थे एक मौलाना

उनके बेटे शाहिद रफी ने बीबीसी को दिए गए एक इंटरव्यू में बताया था कि साल 1970 के आसपास उनके वालिद हज के पाक सफर पर गए थे. इस दौरान उन्हें एक मौलाना मिले, जिन्होंने उन्हें कहा कि जो आप गाना गाते हैं वह इस्लाम में जायज़ नहीं है और ऐसा करने से वह गुनाह में शरीक हो रहे हैं. इसके बाद उनके वालिद घबरा गए थे और उन्होंने गाना न गाने का फैसला किया था.

फिर से सिंगिंग की शुरू

शाहिद आगे कहते हैं लेकिन उन्होंने कुछ दिनों बाद अपने फैसले को बदल दिया और फिर से गाना शुरू कर दिया. ज्ञात हो कि इस्लाम में म्यूजिक को हराम करार दिया गया है, इसके पीछे कई स्कॉलर वजह बताते हैं कि ये इंसान को इमोशनली कमजोर या आक्रमक कर देता है.

मोहम्मद रफी की 55 साल की उम्र में मौत

आज जब मोहम्मद रफी का जिक्र आता है, तो उनके आगे हर कोई लेजेंड लगाने से नहीं चूकता है.मोहम्मद रफी इस दुनिया में ज्यादा दिन नहीं रहे.उनकी मौत 31 जुलाई 1980 को हुई. मात्र 55 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली और वह हमेशा के लिए एवरग्रीन और मंत्रमुग्ध करने वाले गाने इस जगत को दे गए.

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Sami Siddiqui

समी सिद्दीकी उप्र के शामली जिले के निवासी हैं, और 6 से दिल्ली में पत्रकारिता कर रहे हैं. राजनीति, मिडिल ईस्ट की समस्या, देश में मुस्लिम माइनॉरिटी के मसले उनके प्रिय विषय हैं. इन से जुड़ी सटीक, सत्य ...और पढ़ें

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