Ahmedabad Sania Suicide Case: गुजरात के अहमदाबाद के गोमतीपुर इलाके की 22 साल की सानिया अंसारी पुलिस अफसर बनना चाहती थीं, लेकिन मकान विवाद और इंसाफ न मिलने की वजह से उन्होंने आत्महत्या कर ली. परिवार ने 15.50 लाख रुपये देकर घर खरीदा था, लेकिन विक्रेता की मौत के बाद कब्ज़ा नहीं मिला.
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Ahmedabad Sania Suicide Case: गुजरात के अहमदाबाद के गोमतीपुर इलाके की रहने वाली 22 साल की सानिया अंसारी का सपना था कि वह पुलिस की वर्दी पहनकर समाज के उन लोगों की मदद करे, जिनके पास इंसाफ पाने का कोई रास्ता नहीं होता लेकिन हालात ऐसे बने कि वही सानिया न्याय की तलाश में खुद दम तोड़ बैठी. शनिवार को सानिया ने आत्महत्या कर ली. मरने से पहले उसने एक सुसाइड नोट लिखा है. इस सुसाइड नोट में उसने अपनी मौत के लिए ज़िम्मेदार लोगों के नाम भी लिखे हैं.
दरअसल, अंसारी परिवार पिछले 16 सालों से अहमदाबाद के गोमतीपुर इलाके में रह रहा था. अक्टूबर 2024 में उन्होंने अपने पड़ोस में रहने वाले हिंदू परिवार से एक मकान 15.50 लाख रुपये में खरीदा. सौदे की रकम दी जा चुकी थी, लेकिन घर की चाबी सौंपने से पहले ही दिसंबर 2024 में विक्रेता के शौहर का निधन हो गया. इस वजह से मकान का कब्ज़ा देने की प्रक्रिया टल गई. जनवरी 2025 आते-आते स्थिति और उलझ गई. मकान बेचने वाली महिला ने घर की चाबी अपनी मां शाहजहां को सौंप दी, जबकि घर की पहली मंजिल पर उसका बेटा पहले से रह रहा था. बेटे ने यह कहते हुए घर खाली करने से इनकार कर दिया कि संपत्ति पर उसका भी अधिकार है. इसी विवाद से अंसारी परिवार के लिए मुश्किलें और शुरू हो गईं.
सानिया बड़ी बहन रिफतजहां ने बताया कि परिवार को लगातार धमकियां मिल रही थीं. यहां तक कहा गया कि अगर वे मकान पर कब्ज़ा लेने की कोशिश करेंगे, तो उन पर अशांत क्षेत्र अधिनियम (Disturbed Areas Act) के तहत कार्रवाई की जाएगी. यह गुजरात का एक विशेष कानून है, जिसके तहत साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाकों में संपत्ति की खरीद-बिक्री बिना प्रशासन की इजाजत के नहीं हो सकती.
7 अगस्त की रात हालात और बिगड़ गए. रिफतजहां के मुताबिक़, उनके नए घर के ग्राउंड फ्लोर पर क़रीब 10 लोगों ने हमला बोल दिया. घर में मौजूद उनकी मां, भाई और सानिया को बेरहमी से पीटा गया. सानिया को बालों से घसीटा गया और लात-घूंसों से इतना मारा गया कि उसके पूरे शरीर पर चोट के निशान पड़ गए. हमले के बाद पुलिस ने चार लोगों को गिरफ़्तार कर लिया. सानिया का सुसाइड नोट उसके परिवार वालों ने पुलिस को सौंप दिया, लेकिन गोमतीपुर थाने की पुलिस ने तुरंत एफ़आईआर दर्ज नहीं की. इंस्पेक्टर डीवी राणा ने बताया कि नोट में हिंदी के शब्द अंग्रेज़ी में लिखे थे, जिससे उन्हें शक हुआ कि यह असली है या नहीं. उन्होंने नोट को फ़ॉरेंसिक साइंस लैब भेज दिया और कार्रवाई टाल दी. परिवार ने अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर जीएस मलिक से सीधे मुलाकात की, इसके बाद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ.
पुलिस ने अब मकान बेचने वाले, उसके बेटे और परिवार के अन्य लोगों समेत 6 लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 107 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और धारा 54 (उत्प्रेरक की ज़िम्मेदारी) के तहत मामला दर्ज किया है. वहीं, अंसारी परिवार का दावा है कि उन्हें धमकाया गया था कि अगर वे यह मकान खरीदेंगे, तो उनके खिलाफ अशांत क्षेत्र अधिनियम का इस्तेमाल होगा. दरअसल, यह कानून प्रशासन को यह ताक़त देता है कि सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाक़ों में संपत्ति का सौदा बिना अनुमति न हो.