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Khandwa News: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक मदरसे में नकली नोट का गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है. इस रैकेट का मास्टरमाइंड एक MBBS डॉक्टर है, जो पहले सरकारी मेडिकल ऑफिसर था और अब वह जालसाज बन गया है. MBBS डॉक्टर भोपाल में किराए के कमरे से नकली करेंसी का इंटर-स्टेट एम्पायर खड़ा कर लिया.
खंडवा पुलिस ने भोपाल के एक डॉक्टर समेत 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपी गैंग ने ट्रैवल एजेंसी की आड़ में नकली नोट छापे और लाखों की ठगी की. यह वही गैंग है जिसकी वजह से 2 नवंबर को ग्राम पैठिया में स्थित मदरसे में 19 लाख 78 हजार रुपये के नकली नोट मिले थे. आरोपियों को रविवार शाम खंडवा कोर्ट में पेश किया गया और 3 दिन की रिमांड ली गई है.
एडिशनल SP ने किया भंडाफोड़
खंडवा के एडिशनल SP महेंद्र तरानेकर ने रविवार शाम को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, "गैंग का मास्टरमाइंड डॉ. प्रतीक नवलखे और उसके साथी गोपाल उर्फ राहुल और दिनेश गोर भोपाल की गोकुलधाम सोसाइटी में किराए के मकान में ट्रैवल एजेंसी का बोर्ड लगाकर नकली नोट छापते थे. घर में हाई-क्वालिटी प्रिंटर, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और दूसरे सामान का इस्तेमाल करके नोट तैयार किए जाते थे. जावर पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में नकली नोट, सामान और डॉक्यूमेंट्स जब्त किए, जिसमें 32 ATM कार्ड और 15 चेक बुक भी शामिल हैं. गैंग महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में नेटवर्क बनाकर नोटों को सर्कुलेट करने का काम कर रहा था.
12 ATM के साथ ये डेविट कार्ड जब्त
एडिशनल SP महेंद्र तरानेकर ने कहा कि आरोपियों से मिले सामान में बड़े फाइनेंशियल स्कैम की संभावना है. डॉ. प्रतीक नवलखे के पास से 500 रुपये के 13 नकली नोट, 7 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 15 चेक बुक, 12 ATM और डेबिट कार्ड जब्त किए गए. गोपाल उर्फ राहुल के पास से 500 रुपये के 6 नकली नोट, एक ड्रायर मशीन, 2 मोबाइल फोन, 20 ATM और डेबिट कार्ड जब्त किए गए. दिनेश गोर के पास से 500 रुपये के 17 नकली नोट बरामद किए गए. आरोपियों को खंडवा कोर्ट में पेश करके रिमांड पर लिया गया ताकि गैंग के दूसरे नेटवर्क और सप्लाई चेन का पता लगाया जा सके.
क्या है पूरा मामला
दरअसल, डॉ. प्रतीक नवलखे साल 2019-20 में बुरहानपुर जिला अस्पताल में RMO था. उसने गांधी मेडिकल कॉलेज, इंदौर से MBBS किया था. सरकारी नौकरी के दौरान उस पर फर्जी खरीद और नकली बिलों से जुड़े कई घोटाले करने के इल्जाम लगे. इन्हीं में से एक मामले में एफआईआर हुई और वह खंडवा जेल पहुंच गया. जेल में उसकी मुलाकात इमाम जुबेर अंसारी से हुई. दोनों ने वहीं बैठकर तय किया कि बाहर निकलने के बाद नकली नोटों का कारोबार शुरू करेंगे. जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश तक अपना नेटवर्क फैलाया. इस गिरोह में बाद में दिनेश गोरे और गोपाल राहुल को भी शामिल किया गया.