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Zee SalaamSalaam Crime Newsबुलेट के लिए काट दिया 19 साल की बहू फराह का गला; झकझोर देगी अदालत की टिप्पणी!

बुलेट के लिए काट दिया 19 साल की बहू फराह का गला; झकझोर देगी अदालत की टिप्पणी!

Bareilly News: यह मामला उत्तर प्रदेश के बरेली शहर का है, जहाँ शादी के साल भर के अंदर ही बुलेट बाइक के लिए 19 साल की बहु की गर्दन काटकर उसकी हत्या कर दी है. अदालत ने इस मामले में आरोपी पति, सास और ससुर को मुकदमा शुरू होने के साल भर के अंदर मौत की सजा सुनाई है.

ये एक AI निर्मित प्रतीकात्मक तस्वीर है
ये एक AI निर्मित प्रतीकात्मक तस्वीर है

बरेली: उत्तर प्रदेश का बरेली शहर. यानी आला हज़रत का शहर, जहाँ से आला हजरत ने इस्लाम और अल्लाह के बताए हुए नेक राह पर चलने का पूरी दुनिय को पैगाम दिया..उसी शहर के मुसलमान ऐसी- ऐसी हरकत करते हैं, कि इंसानियत का सर भी शर्म से झुक जाए. दहेज के लिए बहु की हत्या के मुजरिम शौहर, सास और ससुर को एक अदालत ने मौत की सजा सुनाते हुए जो टिपण्णी की है, वो पूरे पुरुष समाज के साथ मुसलमानों के लिए काबिले गौर बात होगी.   

दरअसल, दहेज हत्या के एक मामले में एक मकामी अदालत ने शौहर, उसकी माँ और बाप को मौत की सजा सुनाई है. अपर जिला और सत्र न्यायाधीश ( फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट) रवि कुमार दिवाकर ने अपने फैसले में दहेज के रिवाज की मजम्मत करते हुए सख्त तनकीद की है. जज ने  समाज को चेतावनी दी है कि अगर इस रिवाज को नहीं रोका गया, तो आने वाली पीढ़ियां इस आग में झुलसकर बर्बाद हो जायेंगी. 

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मुजरिम 25 वर्षीय मक़सूद अली फराह का पति और उसका ससुर साबिर अली  फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट परिसर में 

19 साल की बहु की शादी के साल भर बाद ही काट दी थी गर्दन 

सरकारी वकील दिगंबर सिंह ने बताया कि एक मई 2024 को फराह (19) की धारदार हथियार से गला काटकर क़त्ल कर दिया गया. शादी के एक साल बाद ही महज एक बुलेट मोटर साइकिल के लिए फराह का क़त्ल कर दिया गया.  इस मामले में मुजरिम 25 वर्षीय मक़सूद अली फराह का पति है, साबिर अली उसके ससुर और मसीतन उर्फ हमशीरन उसकी सास को मुलजिम बनाया गया था. अदालत ने इस मामले में फराह के शौहर मक़सूद अली, ससुर साबिर अली (60) और सास मसीतन उर्फ हमशीरन (55) को फांसी की सजा सुनाई है. तीनों के खिलाफ नवाबगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था.

यह महज एक लड़की या बहु की हत्या का मामला नहीं है
अदालत ने अपने फैसले में कहा, "आज भी समाज में बेटियों को बोझ समझा जाता है. उनकी शादी को माता-पिता के लिए ज़िन्दगी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मान लिया जाता है, जिससे दहेज जैसे घटिया रिवाज पैदा होते हैं. हमें इस नजरिये को बदलना होगा." जज ने कहा, " अगर इस तरह के अपराधों में नरमी बरती जाती है, तो यह समाज में अपराध को बढ़ावा देने जैसा होगा. दहेज हत्या का यह मामला जघन्यतम अपराध की श्रेणी में आता है. इसलिए गुनाहगारों को फांसी की सजा दी जाती है." अदालत ने कहा, "यह महज एक लड़की या बहु की हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए चेतावनी है. अगर इस तरह के मामलों में सख्त सजा नहीं दी गयी, तो बेटियों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी." 

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