Salman Khan Personality Rights Case: सलमान खान ने अपनी इमेज, नाम, आवाज़ और पर्सनैलिटी के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है. डिजिटल और AI के ज़माने में बढ़ते गलत इस्तेमाल को देखते हुए, उन्होंने "जॉन डो" के नाम से पहचाने जाने वाले लोगों सहित कई लोगों के खिलाफ कानूनी सुरक्षा मांगी है.
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Salman Khan News: बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने अपनी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है. दिल्ली हाईकोर्ट गुरुवार को बॉलीवुड एक्टर सलमान खान द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उनकी पर्सनैलिटी से जुड़ी चीज़ों के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ व्यापक कानूनी सुरक्षा की मांग की गई है.
सलमान का यह कदम उन जानी-मानी हस्तियों की बढ़ती संख्या में एक महत्वपूर्ण जुड़ाव है जो अपनी पहचान के दुरुपयोग को रोकने के लिए न्यायपालिका का रुख कर रहे हैं, खासकर डिजिटल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बदलते दौर में. सलमान ने कोर्ट से कई नामजद और अज्ञात (जॉन डो) प्रतिवादियों को उनके नाम, छवि, आवाज़, शक्ल, डायलॉग, तौर-तरीकों और अन्य विशेषताओं का फायदा उठाने से रोकने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया है, जो उनकी पर्सनैलिटी का हिस्सा हैं.
एक्टर के मुताबिक, कई प्लेटफॉर्म और संस्थाएं बिना सहमति के उनकी पहचान का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं को गुमराह करने, उनके ब्रांड वैल्यू को कम करने और उनके व्यावसायिक और व्यक्तिगत अधिकारों को अपूरणीय क्षति पहुंचाने का जोखिम पैदा हो रहा है. याचिका में हाल के महीनों में देखे गए एक व्यापक ट्रेंड पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें प्रमुख फिल्मी हस्तियों और डिजिटल क्रिएटर्स ने अपनी पहचान के व्यावसायिक और गरिमापूर्ण पहलुओं की रक्षा के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है.
दिल्ली हाईकोर्ट इस न्यायशास्त्र को आकार देने में एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है. इसने पहले अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन, नागार्जुन, अनिल कपूर, अभिषेक बच्चन और कंटेंट क्रिएटर राज शामानी को व्यापक निषेधाज्ञा दी है, जो उनकी संबंधित पर्सनैलिटी के व्यावसायिक शोषण को नियंत्रित करने के उनके विशेष अधिकार को मान्यता देता है.
कोर्ट का दृष्टिकोण पारंपरिक दुरुपयोग से आगे बढ़ा है. इसने AI-जनरेटेड प्रतिरूपण, डीपफेक और अन्य प्रकार के हेरफेर वाले डिजिटल कंटेंट पर कड़ी नज़र रखी है जो किसी व्यक्ति की छवि और प्रतिष्ठा को खतरनाक गति और पहुंच के साथ विकृत कर सकते हैं. कई फैसलों में न्यायाधीशों ने इस बात पर जोर दिया है कि इस तरह के प्रतिरूपण गोपनीयता, गरिमा और पब्लिसिटी अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, जबकि यह भी चेतावनी दी है कि वैध कलात्मक अभिव्यक्ति, व्यंग्य, समाचार रिपोर्टिंग और टिप्पणी संवैधानिक सीमाओं के भीतर संरक्षित रहनी चाहिए.