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नई दिल्ली: इरफान खान ने 29 अप्रैल को मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल में आखिरी सांस लीं. उनके इस दुनिया से रुख़सत होने के बाद फिल्म इंडस्ट्री से लेकर दुनियाभर के उनके फैंस में ग़म का माहौल छा गया.इस आखिरी समय में उनका परिवार उनके साथ साथ था. इरफान की अहेलिया, सुतपा सिकदर उनको अपनी मजबूती बताते थे.
इरफ़ान के इंतेक़ाल के बाद अब उनके परिवार में उनकी अहेलिया सुतापा सिकदार और उनके दो बेटे बाबिल और अयान हैं. सुतपा ने अपने शौहर को याद करते हुए उनके फैंस और चाहने वालों के लिए एक मैसेज लिखा है. इरफान खान को ख़िराजे अक़ीदत पेश करते हुए सुतपा ने लिखा, “मैंने कुछ खोया नहीं... मैंने हर तरह से पाया है.”
From Sutapa, Babil and Ayaan... pic.twitter.com/djfdp5KxTL
— Irrfan (@irrfank) May 1, 2020
इरफान खान के परिवार की ओर से मैसेज-
“मैं इसे परिवार के बयान के तौर में कैसे लिखूं जब पूरी दुनिया को ऐसा लग रहा है कि उन्होंने कोई अपना खो दिया? मैं अकेला कैसे महसूस करूं जब इस घड़ी में लाखों लोग हमारे साथ दुख मना रहे हैं? मैं सबको ये बताना चाहती हूं कि हमने कुछ खोया नहीं है, हमने पाया है. हमने वो चीजें पायी हैं जो उन्होंने हमें सिखाईं, और अब हमें इसे लागू करना चाहिए. फिर भी मैं उन चीजों के बारे में बताना चाहूंगी, जिनके बारे में लोग नहीं जानते हैं.
ये हमारे लिए अविश्वसनीय यकीन करने वाला है, लेकिन मैं इसे इरफान के शब्दों में कहूं, तो 'ये मैजिकल है'. चाहे वो यहां हैं या नहीं, और यही उन्हें सबसे ज्यादा पसंद था, उन्होंने कभी एक रियलिटी से प्यार नहीं किया. मुझे उनसे बस एक ही शिकायत है; उन्होंने मुझे जिंदगीभर के लिए बिगाड़ दिया.
इस सफर में हम कई शानदार लोगों से मिले इसकी काफी लंबी लिस्ट है, लेकिन मैं कुछ लोगों के बारे में बताना चाहूंगी, हमारे ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ नितेश रोहतगी (मैक्स अस्पताल साकेत), जिन्होंने शुरुआत में हमारा हाथ थामा. डॉ डैन क्रेल (यूके), डॉ शीद्रवी (यूके), इस अंधेरे समय में मेरी रौशनी डॉ सेवंती लिमाय (कोकिलाबेन अस्पताल). ये समझाना मुश्किल है कि ये सफर कितना शानदार, खूबसूरत, दर्दनाक और एक्साइटिंग रहा है. मुझे ढाई सालों का ये एक अंतराल लगता है, हमारे 35 सालों के साथ से अलग, जिसकी अपनी शुरुआत, मध्य और अंत रहा, और इरफान इसमें ऑर्केस्ट्रा कंडक्टर की भूमिका में रहे. हमारी शादी नहीं थी, ये एक यूनियन था.
मैं अपने परिवार को एक नाव में देखती हूं, अपने दोनों बेटों, बाबिल और अयान के साथ, आगे बढ़ते हुए... इरफान उन्हें रास्ता दिखा रहे हैं, "वहां नहीं, यहां से मुड़ो", लेकिन क्योंकि जिंदगी सिनेमा नहीं है और इसमें कोई रीटेक नहीं होते, मैं चाहती हूं कि अपने पिता के मार्गदर्शन से तूफान में भी मेरे बच्चे इस नाव में हिफाज़त से पार कर लें. मैंने अपने बच्चों से पूछा, अगर वो अपने पिता से सीखे हुए एक सबक को जोड़ सकते हैं, जो उनके लिए अहम रहा हो.
बाबिल: “अनिश्चितता के सामने सरेंडर करना और ब्रह्मांड में अपने विश्वास पर भरोसा रखना सीखें.”
अयान: “अपने दिमाग को कंट्रोल करना सीखें और इसे आपको कंट्रोल न करने दें.”
अब जब हम उनके पसंदीदा, रात की रानी के पेड़ को वहां लगा रहे हैं, जहां इस शानदार सफर के बाद उन्हें रखा गया है, हमारी आंखों से आंसू बह निकले हैं. थोड़ा वक्त लगेगा, लेकिन फूल खिलेंगे और इसकी खुश्बू फैलेगी और आने वाले सालों में उन सभी तक पहुंचेगी, जिन्हें मैं फैंस नहीं कहूंगी, बल्कि परिवार कहूंगी.”
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