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नई दिल्ली : पाकिस्तान की लाहौर पुलिस ने एक 14 वर्षीय घरेलू नौकरानी के साथ असमतदरी के मामले में एक थिएटर आर्टिस्ट समर राणा को हिरासत में ले लिया है. डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नवाब टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज मुक़दमे के मुताबिक राणा के घर पर नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने का इल्ज़ाम पाँच लोगों के खिलाफ लगाया गया है.
अफसरों के मुताबिक, इस मामले में अदाकारा राणा खुद भी न सिर्फ बच्ची को नुकसान से बचाने में नाकाम रही, बल्कि कथित तौर पर उसका शारीरिक शोषण कराने में बराबर की हिस्सेदार रही है. अफसरों ने कहा कि शुरुआती जाँच के दौरान परेशान करने वाले तथ्य सामने आए हैं. कथित तौर पर अपराधियों ने हमले के वीडियो रिकॉर्ड किए थे, जिससे यह आशंका पैदा हो गई है कि फुटेज लीक हो सकता है और उसका दुरुपयोग किया जा सकता है या ऑनलाइन प्रसारित किया जा सकता है. पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि अभिनेत्री को हिरासत में ले लिया गया है और दीगर मुलजिमों की गिरफ्तारी की कोशिश जारी है.
बाल घरेलू कामगारों पर ध्यान
इस हादसे ने पाकिस्तान में एक बार फिर हज़ारों बाल घरेलू कामगारों के सामने आने वाली असुरक्षित परिस्थितियों की तरफ ध्यान खींचा है. कई बच्चे—अक्सर गरीब परिवारों से—निजी घरों में काम करते हैं, जहाँ वे नियामकों या श्रम निरीक्षकों की नज़रों से ओझल रहते हैं. बाल अधिकार समूहों ने बार-बार इस बात को उजागर किया है कि कैसे ये युवा कामगार, खासकर लड़कियाँ, शोषण, उत्पीड़न और हिंसा की चपेट में आती हैं. घरेलू काम की गोपनीयता और मौजूदा कानूनों की कमियों की वजह से, पीड़ितों को अक्सर सुरक्षा या इन्साफ का मौका नहीं मिल पाता है.
हाल के वर्षों में पाकिस्तान में बाल कामगारों के साथ दुर्व्यवहार से जुड़े कई चर्चित मामले सामने आए हैं, जहाँ घरों में काम करने वाले नाबालिगों को पीटा गया, उन्हें वक़्त पर वेतन नहीं दिया गया, या उनके नियोक्ताओं ने उनके साथ गंभीर दुर्व्यवहार किया. कुछ मामलों में, बंद दरवाजों के पीछे दी गई यातनाओं के कारण बच्चों की मौत तक हो गई है. बाल अधिकार एक्टिविस्ट का मानना है कि बाल श्रम पर रोक लगाने और नाबालिगों की सुरक्षा के लिए कानून तो मौजूद हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाता है. गरीबी और शिक्षा तक पहुँच का अभाव बच्चों को घरेलू कामों में धकेलता है, जहाँ वे शोषण के शिकार हो जाते हैं.
सुधार की माँग
मानवाधिकार अधिवक्ताओं का कहना है कि समर राणा के खिलाफ मामला व्यवस्थागत बदलाव की फौरी ज़रुरत की तरफ ध्यान दिलाता है. वे नाबालिगों को काम पर रखने वाले घरों की कड़ी निगरानी, दुर्व्यवहार के दोषी पाए जाने वालों के लिए कड़ी सज़ा और बाल पीड़ितों के लिए बेहतर पुनर्वास सेवाओं की माँग करते हैं.
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