)
Singer Zubeen Garg Death: साल 2006 में आई ब्लॉकबूस्टर मूवी 'गैंगस्टर' में 'या अली मदद आली' गाना गाकर रातों- रात शोहरत की बुलंदियों पर पहुँचने वाले सिंगर जुबिन गर्ग की शुक्रवार को मौत हो गई. बताया जा रहा है कि वो सिंगापुर में किसी म्यूजिकल कॉन्सर्ट में परफॉरमेंस देने गए थे, वहीँ उनका निधन हो गया. प्रोग्राम के पहले वो स्कूवा डाइविंग करने गए थे, वहीँ उन्हें सांस लेने में तकलीफ महसूस हुई. उन्हें सीपीआर दिया गया और तत्काल एक नजदीकी अस्पताल में ले जाया गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.
सिंगर जुबिन गर्ग ने यूं तो सैकड़ों गाने गाये हैं लेकिन उन्हें पहली बार शोहरत 'गैंगेस्टर' फिल्म के गाने 'या अली मदद आली' से मिली थी. इस गाने को सईद कादरी ने लिखा था और प्रीतम ने इसमें म्यूजिक दिया था. इस फिल्म में इमरान हाशमी, कंगना रनौत और शाइनी आहूजा ने किरदार निभाया था. इस फिल्म के सभी गाने सुपर डुपर हिट साबित हुए थे. दो गानों में उर्दू के बोल शामिल किये गए थे. 'तू ही मेरा शब् है तूही सुबह है' और 'या अली मदद आली'. या अली मदद आली गीत को जुबीन गर्ग ने गाया था. ये गीत आज भी युवाओं के सर चढ़कर बोल रहा है. लगभग 20 साल बाद भी इस गाने के चाहने और सुनने वाले कम नहीं हुए हैं.
या अली रहम आली
या अली मदद आली
या अली ये मेरी जान ये जिंदगी
इश्क़ पे हां...
मिटा दूं लुटा दूं मैं अपनी खुदी
यार पे हां...
इस गीत के मुखरे 'या अली मदद आली' का शाब्दिक अर्थ है 'ओ अली, मेरी मदद करो. यह एक तरह से दुआ है, जो मुसलमान (खासकर शिया समुदाय) मुश्किल वक़्त में हजरत अली से मदद मांगने के लिए इस्तेमाल करते हैं. यूं तो इस्लाम में सब कुछ अल्लाह से माँगा जाता है. लेकिन जब मुसलमानों को हिम्मत और हौसले की ज़रूरत होती है तो वो अक्सर या अली कहकर मदद की गुहार लगाता है. जैसे हिन्दुओं को 'जय बजरंगबलि' के उद्घोष से ताकत मिलती है वैसे ही कुछ मुसलमान भी 'या अली' के उद्घोष से ताकत हासिल करते हैं. सईद कादरी इस गाने में प्रेम के इन्तेहां (चरमोत्कर्ष) पर पहुंचे एक आशिक की मनोदशा का जिक्र कर रहे हैं, जो अपनी प्रेमिका के लिए सब कुछ कुर्बान करने को आतुर है. वो अपनी हस्ती और वजूद को मिटा देना चाहता है. यहाँ आशिक अली से अपनी प्रेमिका से मिलाने की दुआ कर रहा है. वो कह रहा है कि प्रेमिका के बिना उसका कोई वजूद नहीं है..
सईद कादरी का लिखा और जुबीन गर्ग का गाया हुआ ये गाना महज गाना नहीं बल्कि प्रेम में पड़े और प्रेम विहल देश के लाखों करोड़ों नौजवानों के जज्बात को अभिव्यक्ति देते हैं, उसकी भावों की तर्जुमानी करते हैं.
जब जुबीन गाते हैं ' बिना तेरे ने कोई कल हो, ये दिल बन जाए पत्थर का न इसमें न कोई हलचल हो. तो ये लाइन एक प्रेमी के प्रेम की चरम वेदना को व्यक्त करता है. जुबीन ने इन वेदना को अपनी दर्द भरी आवाज़ से और भी हस्सास बना देते हैं. इस गीत को सुनकर किसी पुराने आशिक के दिल के जख्म के टाँके भी टूट जाते हैं!
जुबीन गर्ग की मौत की खबर से उनके चहेतों को काफी गहरा सदमा लगा है. जुबीन की मौत गीत और संगीत के दीवानों के दिलों में हमेशा एक खालिस छोड़ जाएगा, जिसे भर पाना या भुला पाना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन भी होगा.