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नई दिल्लीः बदलते दौर में फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी नए किस्म के पेशेवरों की भी मांग बढ़ने लगी है. हाल के दिनों में इंटिमेट डाइरेक्टर नाम के एक नए पेशेवर की मांग तेजी से बढ़ रही है. अभिनेत्री दीपिका पादुकोण और सिद्धांत चतुर्वेदी अभिनीत और आगामी 11 फरवरी को लाॅन्च होने वाली बॉलिवुड फिल्म ’गहराइयां’ से ’इंटिमेसी डायरेक्टर’ वर्ड लोक विमर्श का हिस्सा बन गया और लोग इसपर चर्चा करने लगे हैं. बाॅलीवुड अभी तक इस शब्द से अंजान था. कहा जा रहा है कि ’गहराईयां’ भारत में बनने वाली पहली फिल्म है जिसमें ’इंटिमेसी डायरेक्टर’ ने अपनी भूमिका निभाई है.
मीटू कैंपेन के बाद से बढ़ी इस प्रोफेशनल की मांग
जानकारों का मानना है कि मीटू कैंपेन के बाद से ही बाॅलीवुड में इंटीमेसी डायरेक्टर्स फिल्मी सेट्स का हिस्सा बनने लगे हैं. दरअसल, इसका काम है एक्टर्स को सेफ्टी देना और उसके मेंटल प्रेशर को काम करना और इंटिमेट सीन की शूटिंग के लिए उसे सहज बनाना. खासकर देश और दुनिया भर में मीटू मामलों के सामने आने के बाद इंटिमेसी डायरेक्टर की जरूरत महसूस की गई थी. इस घटना के बाद एक्टर्स को ज्यादा मानवीय नजरिए से देखा जाने लगा है.
कौन होते हैं इंटीमेसी डायरेक्टर्स
इंटीमेसी डायरेक्टर को इंटीमेसी स्पेशिलिस्ट भी कहा जाता है, जिसका काम होता है कि कैसे किसी इंटीमेट सीन को बेहतर बनाया जाए. वह एक्टर से फिल्म के इंटीमेट सीन के बारे में बात करता है, उस सीन को सही अंदाज में समझाता है उसकी रिहर्सल आदि करवाता है. ’गहराइयां’ के इंटीमेसी डायरेक्टर कहते हैं कि इंटिमेसी स्पेशिलिस्ट की भूमिका एक ’रक्षक’ की होती है, जो कलाकार को ’ट्रॉमा’ से बचाता है.
डायरेक्टर और एक्टर के बीच ब्रिज का काम करता है
जब कोई एक्टर और एक्ट्रेस फिल्म में इंटिमेट सीन शूट करते हैं तो ऐसे में स्वभाविक तौर पर एक्टर्स अनकंफर्टेबल फील करते हैं खास कर एक्ट्रेस पर ज्यादा मानसिक तनाव होता है. एक्टर्स पर दिमागी प्रेशर होने के कारण सीन खराब होने के चांस बढ़ जाते हैं. ऐसे हालातों में इंटीमेसी डायरेक्टर एक्टर्स की मदद करता है ताकि सीन को सही तरह से फिल्माया जा सके. आसान भाषा में इंटीमेसी डायरेक्टर एक्टर्स और डायरेक्टर के बीच में एक ब्रिज का काम करता है. इसके अलावा इंटीमेसी डायरेक्टर का काम किसी इंटीमेट सीन का बेहतर विकल्प बताना और शूट करते वक्त सही एंगल्स का सुझाव देना भी होता है.
क्यों जरूरत होती है इंटीमेसी डायरेक्टर की
इंटिमेसी डायरेक्टर और उसकी टीम सेट पर इस्तेमाल होने वाले कपड़ों को फाइनल करती है, ताकि वह स्क्रीन पर बेहतर लगे. साथ ही टीम यह सुनिश्चित करती है कि इंटीमेट सीन की शूटिंग के दौरान कोई भी ऐसा इंसान न रहे जिसकी सेट पर जरूरत नहीं है ताकि एक्टर्स सीन को सही से दे सकें. यह जिम्मेदारी भी इंटीमेसी डायरेक्टर की ही होती है कि फिल्म की एडिटिंग इस तरह से कराए कि उस सीन विशेष को लेकर कोई अड़चन आदि न पैदा हो जाए.
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