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Denmark Recognition of Palestine: गाजा में अमेरिका के सहमति से इजरायल का नरसंहार जारी है. लाखों लोगों की जान खतरें में हैं. अभी तक 65 हजार से ज्यादा लोग इस युद्ध में मारे जा चुके हैं. जबकि 2 लाख से ज्यादा जख्मी हुए हैं. गाजा में न स्कूल बचा हैं और न ही हॉस्पिटल. सभी जगहों पर IDF भीषण बमबारी कर रही है और फिलिस्तीनियों को विस्थापन करने पर मजबूर कर रही हैं. गाजा में लगभग 80 फीसद तक सभी मकान, स्कूल और हॉस्पिटल जमींदोज हो गए हैं. इन हमलों के बीच इजरायल अब अलग-थलग पड़ता जा रहा है. पहले ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने फ़िलिस्तीन को देश का दर्जा देकर अमेरिका और इजरायल को करारा झटका दिया.
अब, कई यूरोपीय देश इजरायल को देश का दर्जा देने की तैयारी कर रहे हैं. इनमें फ़्रांस सबसे प्रमुख है. इस बीच, डेनमार्क भी फ़िलिस्तीन को देश का दर्जा देने जा रहा है. इसके लिए, डेनमार्क ने फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने की रूपरेखा तैयार कर ली है और जल्द ही इस रूपरेखा को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश करेगा. डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने यह ऐलान किया है. उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, डेनमार्क फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने पर "स्पष्ट रुख" अपनाएगा.
अरब देशों में खुशी की लहर
यूरोपीय देशों के इस फ़ैसले से अरब देश काफी खुश हैं. सऊदी अरब समेत कई मुस्लिम देशों ने ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के फ़ैसलों पर अपनी ख़ुशी ज़ाहिर की है. माना जा रहा है कि नेतन्याहू अपनी जिद की वजह से यूरोपीय देशों से अलग-थलग होते जा रहे हैं. कई देशों ने इजरायल के साथ व्यापार बंद कर दिया है और कई देशों ने हथियार बेचना भी बंद कर दिया है. वहीं, इजरायल का कहना है कि जिन देशों ने फिलिस्तीन को देश का दर्जा दिया है, वे ही 7 अक्टूबर को हुए हमले के लिए हमास को इनाम दे रहे हैं.
आग से खेल रहे हैं नेतन्याहू
मिडिल ईस्ट के जानकारों का मानना है कि नेतन्याहू अपनी सत्ता बचाने के लिए इजरायल को जबरन युद्ध की आग में घसीट रहे हैं और आग से खेल रहे हैं. मिडिल ईस्ट के एक्सपर्ट शम्स अज़ीज़ का कहना है कि आने वाला साल मध्य पूर्व के लिए बेहद अहम है. इस क्षेत्र में कभी भी युद्ध छिड़ सकता है और इसके लिए नेतन्याहू खुद ज़िम्मेदार होंगे. क्योंकि नेतन्याहू हमास के खात्मे के बहाने गाजा में नरसंहार कर रहे हैं. नेतन्याहू को लगता है कि वह किसी न किसी बहाने फिलिस्तीन और ईरान पर हमले करते रहेंगे और सत्ता में बने रहेंगे, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब दुनिया इजरायल को अपने यहां से दुत्कार कर भेज देगी.