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America Pressurizing Israel: अमेरिका ने इसराइल पर दबाव डाला है कि गाज़ा के साउथ हिस्से रफ़ा में येलो लाइन के इसराइल के कंट्रोल इलाके में सुरंगों में छिपे 100 से 200 हमास लड़ाकों को सुरक्षित रूप से निकलने दिया जाए.
वॉशिंगटन इस कोशिश को हमास लड़ाकों के लिए हथियार छोड़ने और माफी देने के प्लान की शुरुआत के तौर पर देख रहा है. यह प्लान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाज़ा संघर्ष खत्म करने की 20 सूत्रीय योजना का हिस्सा बताई जा रही है.
प्रस्ताव के तहत, लड़ाके अपने हथियार अमेरिका के नेतृत्व वाले सिविल-मिलिट्री कोऑर्डिनेशन सेंटर (किरयात गट में स्थित) के अधिकारियों को सौंप देंगे. इसके बाद उन्हें या तो किसी तीसरे देश जाने के लिए सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा या येलो लाइन के पश्चिम में हमास-नियंत्रित इलाकों में लौटने की अनुमति दी जाएगी.
राजनयिक ने बताया कि अमेरिका इस पहल को लेकर इसराइल और तुर्किये के साथ लगातार बातचीत कर रहा था. हालांकि इसराइल ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज नहीं किया, लेकिन उसने सभी हमास लड़ाकों को जाने देने से इनकार किया है. इसराइल का कहना था कि कुछ लड़ाके इसराइली नागरिकों पर हमलों में शामिल हो सकते हैं, इसलिए उन्हें या तो आईडीएफ (इसराइली सेना) की हिरासत में लिया जाना चाहिए या मुकाबले में मारा जा सकता है.
ट्रंप के 20 प्वाइंटर्स के प्रस्ताव में कहा गया है कि जब सभी बंधकों को वापसी होगी को हमास को हथियार डालने होंगे. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सितंबर में व्हाइट हाउस में इस रूपरेखा को मौखिक रूप से स्वीकार किया था. हालांकि 9 अक्टूबर को इसराइल और हमास के बीच हुए समझौते में केवल प्रारंभिक संघर्षविराम, आईडीएफ की वापसी, बंधक-वकैदी अदला-बदली और मानवीय सहायता पर सहमति बनी थी, जबकि सुरक्षित रास्ता का मुद्दा अधूरा रह गया है.
सार्वजनिक रूप से नेतन्याहू का रुख सख्त रहा है. पिछले हफ्ते उनके कार्यालय ने बयान जारी कर कहा था कि इसराइल सुरंगों में छिपे हमास लड़ाकों को सुरक्षित रास्ता नहीं देगा. द टाइम्स ऑफ़ इसराइल को एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि मिस्र और क़तर के मध्यस्थों ने हमास को सूचित किया था कि उसके पास 24 घंटे हैं ताकि वह अपने लड़ाकों को "येलो लाइन" के इसराइली हिस्से से निकाल ले, वरना उन्हें इसराइली हमले का सामना करना पड़ सकता है.