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America News: अमेरिकी विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मार्को रुबियो ने येरुशलम में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाक़ात के दौरान ट्रंप प्रशासन की ओर से उन्हें पूरा समर्थन देने की बात कही है. उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन की प्राथमिकता इज़रायली बंधकों की रिहाई और हमास का सफाया है.
रुबियो ने एक पब्लिक स्टेटमेंट में सीजफायर का कोई ज़िक्र नहीं किया. उन्होंने पिछले हफ्ते कतर की राजधानी दोहा में हमास के लीडर्स को निशाना बनाकर किए गए इज़रायली हमले पर पहले जताई गई आलोचना भी दोहराई नहीं. नेतन्याहू ने इस सवाल पर कि क्या कतर पर आगे भी हमले हो सकते हैं, कहा कि आतंकी जहां भी होंगे, उन्हें कोई सुरक्षा नहीं मिलेगी.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने ऐलान किया कि रुबियो मंगलवार को लंदन जाते समय दोहा भी रुकेंगे, ताकि खाड़ी देशों के साथ तनाव कम करने की कोशिश की जा सके. दोहा में अरब और इस्लामी देशों के आपात शिखर सम्मेलन में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी ने आरोप लगाया कि इज़रायल का हमला हमास और इजराइल के बीच सीजफायर को खराब करने के लिए था.
हामास नेता दोहा में उस सीजफायर प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे थे जिसे ट्रंप ने पेश किया था. प्रस्ताव में सभी 20 जीवित बंधकों की रिहाई और 28 लाशों की वापसी शामिल थी. हामास ने अगस्त में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ़ के जरिए सुझाए गए फेज़ वाइज़ सीज़फायर प्रस्ताव को कबूल किया था.
रुबियो ने येरुशलम में कहा कि अमेरिका शांति समाधान की कोशिशें जारी रखेगा, लेकिन यह तभी संभव होगा जब हमास का अंत होगा. उन्होंने कहा, "सभी 48 बंधकों ज़िंदा और मरे हुए लोगों को घर लौटाना चाहिए.
रुबियो ने चेतावनी दी कि ब्रिटेन, फ़्रांस, कनाडा, बेल्जियम और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के जरिए फ़िलस्तीन को मान्यता देना शांति की राह मुश्किल करेगा. उनके मुताबिक इससे कट्टरपंथी गुटों को बढ़ावा मिलेगा.
इज़रायली सेना गाज़ा सिटी में बड़े पैमाने पर ज़मीनी हमले की तैयारी कर रही है और लगातार इमारतों को ध्वस्त कर रही है. संयुक्त राष्ट्र राहत एजेंसी (UNRWA) के अनुसार, पिछले चार दिनों में उसके 10 बिल्डिंग्स, जिनमें सात स्कूल और दो क्लीनिक शामिल हैं पर बमबारी हुई है. नेतन्याहू ने कहा कि ऊंची इमारतों को लोगों को डराने के लिए नहीं, बल्कि हमास के ठिकानों को खत्म करने के लिए गिराया जा रहा है.