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Egypt Force: मिस्र ने कहा है कि वह गाज़ा पट्टी में इंटरनेशनल फ़ोर्स भेजने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का प्रस्ताव और एक मज़बूत राजनीतिक ढांचा ज़रूरी होगा. यह बयान काहिरा में चल रही सीजफायर बातचीत के बाद आया है.
मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलाती ने फिलिस्तीनी प्रधानमंत्री मोहम्मद मुस्तफ़ा के साथ रफ़ा बॉर्डर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हम तैयार हैं कि गाज़ा में किसी इंटरनेशनल फ़ोर्स का हिस्सा बनें. लेकिन इसके लिए सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव होना चाहिए, एक साफ मैंडेट होना चाहिए और यह सब एक राजनीतिक दिशा के साथ होना ज़रूरी है. बिना राजनीतिक दिशा के किसी फ़ोर्स की तैनाती बेमानी होगी"
अब्देलाती ने कहा कि एक राजनीतिक ढांचा ही इंटरनेशनल फोर्स को कारगर बनाएगा और फिलिस्तीनियों को अपना स्वतंत्र राज्य हासिल करने में मदद करेगा. वहीं, प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा ने कहा कि युद्ध के बाद गाज़ा को एक अस्थायी समिति संभालेगी, लेकिन पूरी सत्ता फिलिस्तीनी सरकार के पास ही रहेगी. उन्होंने कहा कि हम गाज़ा में कोई नया राजनीतिक ढांचा नहीं बना रहे हैं, बल्कि फिलिस्तीन राज्य और उसकी सरकार की संस्थाओं को सक्रिय कर रहे हैं.
हमास भी पहले ऐसी अस्थायी समिति के विचार का स्वागत कर चुका है, जो राहत, पुनर्निर्माण और प्रशासन संभाले. हालांकि, यह अभी साफ़ नहीं है कि वह गाज़ा पर कंट्रोल छोड़ने को तैयार है या नहीं।
इसी बीच, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फ़त्ताह अल-सिसी ने काहिरा में क़तर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी* से मुलाक़ात की. दोनों नेताओं ने गाज़ा में तुरंत संघर्षविराम की ज़रूरत, मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति, और बंधकों की रिहाई पर ज़ोर दिया.
उन्होंने दोहराया कि गाज़ा दोबारा से मिलिट्री कब्जे या फिलिस्तीनियों के विस्थापन को कबूल नहीं किया जाएगा. साथ ही, उन्होंने पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर एक आज़ाद फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना को स्थायी शांति और स्थिरता की शर्त बताया.
मुलाक़ात में यह भी तय हुआ कि संघर्षविराम के तुरंत बाद गाज़ा में पुनर्निर्माण शुरू किया जाएगा और इसके लिए संयुक्त राष्ट्र व फिलिस्तीनी सरकार के सहयोग से एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा.