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Gaza News: गाजा में जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उससे सब वाकिफ हैं. लेकिन, इजराइली सेना खाना देने के बहाने जो कांड कर रही है उससे पूरी दुनिया ने अपनी निगाहें हटाई हुई हैं. अमेरिकी और इजराइली समर्थित एजेंसी फिलिस्तीनियों को खाना देना का वादा करती है और जब लोग खाना लेने के लिए इकट्ठा होता हैं तो इजराइली सैनिक अंधाधुन फायरिंग करने लगते हैं. ये कुछ ऐसा है, जैसे किसी जानवर के लिए खाना डालकर जाल बिछाना.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने शुक्रवार को बताया कि पिछले छह हफ्तों में गाजा में खाना बांटने वाले सेंटर्स के पास कम से कम 798 लोगों की मौत हो चुकी है. OHCHR की स्पीकर रवीना शमदसानी ने बताया कि इन मौतों में से 615 लोग अमेरिका और इजरायल समर्थित गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन (GHF) के सेंटर्स के पास मारे गए और बाकी 183 खाना ले जाने के दौरान मारे गए.
हाल ही में इजराइली सेना ने इस बात को कबूल किया था कि उन्होंने निहत्थे, भूखे और खाना लेने आए फिलिस्तीनियों पर फायरिंग की थी. GHF ने संयुक्त राष्ट्र के इन आंकड़ों को झूठा और गुमराह करने वाला बताया है. GHF का कहना है कि उनके राहत केंद्रों पर किसी की मौत नहीं हुई है और सबसे ज्यादा घातक हमले तो खुद युनाइटेड नेशन्स के काफिलों पर हुए हैं.
सीजफायर हटने के बाद जंग शुरू हुई और गाजा में मदद को पूरी तरह से रोक दिया गया. इसके बाद GHF ने मई के आखिर में गाजा में खाना बांटना शुरू किया था. GHF अमेरिकी निजी सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स कंपनियों की मदद से गाजा में राहत पहुंचा रहा है.
OHCHR ने अपने आंकड़ों को सही बताते हुए इसे इकट्ठा करने का तरीका भी बताया है. एजेंसी ने कहा कि उसके आंकड़े गाजा के अस्पतालों, कब्रिस्तानों, परिवारों, स्वास्थ्य विभाग, गैर-सरकारी संगठनों और वहां मौजूद अपने साथियों से मिली जानकारी पर आधारित हैं.
इजरायली सेना का कहना है कि वह राहत केंद्रों के पास इसलिए तैनात है ताकि मदद की सामग्री आतंकियों के हाथ न लग सके. बता दें, गाजा में मानवीय हालात बहुत खराब हैं. लोगों के पास खाना, पानी, दवाई और दूसरी चीजों की भारी कमी है.