Gaza: गापिछले महीने 23 मार्च को इजराइली सेना ने दवा ले जा रहे काफिले पर अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें कम से कम 15 अस्पताल और फायर ब्रिगेड कर्मचारियों की मौत हो गई थी, जिसके बाद इजराइल की दुनियाभर में आलोचना हो रही थी.
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Gaza: इजराइल लगातार गाजा पर हमला कर रहा है. इस हमले की वजह से गाजा खंडहर में तब्दील हो चुका है. नेतन्याहू की सेना मानवता के खून की प्यासी हो गई है. IDF को आम नागरिक, डॉक्टर और हमास में कोई फर्क नहीं दिखता है, सेना सिर्फ लोगों की जान लेने पर तुली हुई है. पिछले महीने 23 मार्च को इजराइली सेना ने दवा ले जा रहे एंबुलेंस के काफिले पर अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें कम से कम 15 अस्पताल और फायर ब्रिगेड कर्मचारियों की मौत हो गई थी, जिसके बाद इजराइल की दुनियाभर में आलोचना हो रही थी.
इस हमले के बाद इजरायल ने अपनी गलती नहीं मानी थी. अब 1 महीने बाद इजरायल ने अपनी गलती मानी है और इस हमले में शामिल गोलानी ब्रिगेड की टोही यूनिट के उप कमांडर पर बड़ी कार्रवाई की है और गाजा से इस यूनिट को हटा दिया है. इजराइल रक्षा बलों (आईडीएफ) के मुताबिक, गोलानी ब्रिगेड की टोही इकाई के उप कमांडर, जिसने एम्बुलेंस और आपातकालीन वाहनों के काफिले पर गोलीबारी की थी. जांच के बाद इस यूनिट के कमांडर को बर्खास्त कर दिया गया है.
IDF ने मानी अपनी गलती
IDF ने कहा कि घटना पर "आंशिक और गलत" रिपोर्ट दर्ज करने के लिए यूनिट कमांडर को भी हटाया जा रहा है. इसके अलावा, इजरायली सेना 14वीं रिजर्व आर्मर्ड ब्रिगेड के कमांडर की भी औपचारिक रूप से निंदा की, जो उस समय राफा में ऑपरेशन का नेतृत्व कर रही थी जब चिकित्सकों की हत्या हुई थी. हालांकि, IDF ने उन आरोपों से इनकार किया कि सेना ने चिकित्सकों और बचावकर्मियों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, और कहा कि सैनिकों ने गलत तरीके से एम्बुलेंस को हमास के वाहन के रूप में पहचाना.
गलती से हुई गोलीबारी
इज़रायली सेना (IDF) की जांच में कहा गया है कि रात के समय कई एम्बुलेंस बिना किसी रुकावट के सड़क से गुजर गईं और कई आम नागरिकों को पकड़ा गया. इससे यह साबित होता है कि सैनिकों ने एम्बुलेंस पर बिना सोचे-समझे गोलीबारी नहीं की थी. IDF का कहना है कि सैनिकों को खतरे का अंदेशा हुआ था. वे एक गाड़ी का पीछा कर रहे थे, जिसे उन्होंने गलती से हमास की पुलिस गाड़ी समझ लिया था.
फौरन बंद हो गई थी गोलीबारी- इजरायली सेना
जांच रिपोर्ट में IDF ने यह भी कहा कि जब सैनिकों को समझ में आया कि वे एम्बुलेंस पर गोली चला रहे हैं, तो उन्होंने फौरन गोलीबारी बंद कर दी. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि सैनिकों ने किसी डॉक्टर को मारा या उन्हें हथकड़ी पहनाई.