Gaza Starvation: इजराइल पर वॉर क्राइम के इल्जाम लगते आए हैं और अब नेतन्याहू सरकार ने गाजा के लोगों को खाना पानी रोक कर भूख को हथियार बनाने का काम किया.
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Gaza Starvation: एक दर्जन से ज्यादा मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इजरायल की निंदा की है और कहा है कि उसने गाजा में भुखमरी को हथियार बनाना फिर से शुरू कर दिया है. इजराइल चाहता था कि पहला फेज आगे बढ़े और सभी बंधकों को छोड़ा जाए और वहीं, हमास ने कहा था कि पहले फेज के खत्म होने के बाद तय किया गया दूसरा फेज लागू किया जाए. इसी बात से खफा इजराइल ने गाजा के लोगों को पहुंच रहे खाना पानी को बंद कर दिया है.
युनाइटेड नेशन के आजाद एक्सपर्ट्स ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि यह कदम "इंटरनेशनल लॉ और अमन की किसी भी संभावना का घोर उल्लंघन है." उन्होंने कहा, "हम इजरायल के उस फैसले से फिक्रमंद हैं. जिसमें उसने एक बार फिर गाजा पट्टी में एंट्री करने वाली मानवीय सहायता सहित सभी वस्तुओं और आपूर्तियों को रोक दिया है."
प्रेस रिलीज में कहा गया कि इस तरह की नाकेबंदी इंटरनेशनल ह्यूमेटेरियन और ह्यूमन राइट्स कानूनों का उल्लंघन है और इसे इंसानियत के खिलाफ क्राइम माना जाता है. इसके आगे कहा गया है कि तीन फेज का सीजफायर समझौते से दुश्मनी का स्थायी खात्मा होना चाहिए था. इस के साथ ही सभी फिलिस्तीनियों और इज़रायलियों कैदियों को छोड़ा जाना चाहिए था, जो स्थायी शांति के लिए सबसे बुनियादी आवश्यकता है. इसके बजाय, इससे और अधिक हिंसा हुई और फिलिस्तीनी जीवन का और भी ज्यादा नुकसान हुआ. यह गैरकानूनी और पूरी तरह से गलत है"
बता दें, हमास और इजराइल के बीच तीन फेज सीजफायर पर सहमती बनी थी. इस दौरान बंधकों की अदला बदली होनी थी. लेकिन, पहले फेज के खत्म होने के बाद इजराइल ने कहा कि पहले फेज को आगे एक्सटेंड कर दिया जाए और सारे बंधकों को छोड़ा जाए. वहीं हमास ने कहा कि दूसरा फेज लागू किया जाए और उसके बाद ही बंधकों की रिहाई होगी और इस दौरान इजराइली सैनिकों की भी वापसी हो.