Gaza News: गाजा में हालात संजीदा बने हुए हैं. लेकिन, अब एक इजराइली रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ है, उसके बाद से इजराइल सरकार मुंह छिपाती फिर रही है. इस रिपोर्ट से साफ होता है कि हमास के बहाने कैसे नेतन्याहू ने आम नागरिकों को टारगेट किया.
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Gaza News: इजराइल हिब्रू भाषा की वेबसाइट लोकल कॉल और +972 मैगज़ीन की ज्वाइंट जांच में दावा किया गया है कि गाज़ा में अब तक मारे गए फ़िलिस्तीनियों में से 83 प्रतिशत तक आम नागरिक हो सकते हैं. यह निष्कर्ष इज़राइली अधिकारियों के आंतरिक आंकड़ों के हिसाब से पेश किया गया है.
जांच के मुताबिक, मई 2024 तक इज़राइल केवल 8,900 मारे गए लोगों को हमास और इस्लामिक जिहाद के सदस्य के तौर पर पहचान पाया था. उस समय स्थानीय अधिकारियों के अनुसार युद्ध में कुल मौतों का आंकड़ा लगभग 53,000 था. यानी सिर्फ़ 17 फीसद मरने वावे लोग लड़ाकों की कैटेगरी में आते हैं, जबकि बाकी आम नागरिक माने जा सकते हैं.
यह जानकारी गाज़ा से जब्त किए गए दस्तावेज़ों पर आधारित है. कुल मिलाकर इज़राइली सेना ने 47,653 लोगों को हमास या इस्लामिक जिहाद से जुड़ा माना है, जिनमें से लगभग 40,000 अब भी ज़िंदा बताए जाते हैं. इज़राइली सेना का मानना है कि गाज़ा के हेल्थ मिनिस्ट्री के जरिए जारी आंकड़े भी काफ़ी हद तक विश्वसनीय हैं, हालांकि मलबे के नीचे दबे हज़ारों लाशें अब तक दर्ज नहीं हो पाए हैं.
उप्साला कॉन्फ़्लिक्ट डेटा प्रोग्राम की थेरेस पेटरसन ने गार्डियन को बताया कि इतने लंबे वक्त तक चली लड़ाई में इतनी बड़ी तादाद में नागरिकों का मारा जाना बेहद असामान्य है. उन्होंने कहा कि 1989 के बाद सिर्फ़ स्रेब्रेनिका की घेराबंदी, रवांडा नरसंहार और 2022 में मारियुपोल की घेराबंदी में ही ऐसा देखा गया था.
लंदन स्कूल ऑफ़ इकॉनॉमिक्स की प्रोफ़ेसर मैरी काल्डर ने कहा कि गाज़ा में संघर्ष की प्रकृति ही ऐसी है कि इसमें नागरिकों की मौतें असामान्य रूप से ज़्यादा हो रही हैं. उन्होंने कहा,"यह जंग कम और टारगेटेड हत्याओं का अभियान ज़्यादा है, जिसमें नागरिकों की सुरक्षा की कोई परवाह नहीं की जा रही."
फ़िलिस्तीनी विश्लेषक मुहम्मद शेहादा ने कहा कि दिसंबर 2023 तक हमास और इस्लामिक जिहाद के अपने आंकड़ों में मृत लड़ाकों की संख्या सिर्फ़ 6,500 थी. उन्होंने आरोप लगाया कि इज़राइल हर गाज़ा निवासी को हमास से जोड़कर दिखाता है ताकि अधिक लोगों की मौत को जायज़ ठहरा सके.
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक गाज़ा में अब तक मरने वालों की संख्या 62,000 से अधिक हो चुकी है. खाने की किल्लत और सहायता वितरण स्थलों पर हमलों के कारण नागरिक मौतें और बढ़ गई हैं.