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Israel attack on Gaza: इजराइली सेना के जरिये ग़ज़ा में बेगुनाह फिलिस्तीनियों का कत्लेआम तेज कर दिया है. नेतन्याहू सरकार ग़ज़ा पर कब्जा करने के लिए फिलिस्तीन के लोगों के नरसंहार के हर रोज नए मंसूबे बना रही है. इस बीच इजराइल ने हमास के खिलाफ जंग को और तेज करने का ऐलान किया है. इजराइल के इस ऐलान ने दुनियाभर के लोगों और मानवाधिकार संगठनों की पेशानी पर बल पैदा कर दिया है.
दरअसल, मंगलवार (2 सितंबर) को रिजर्व आर्मी जवानों से मिलने पहुंचे इजराइल के सैन्य प्रमुख (चीफ़ ऑफ स्टाफ) लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जामिर ने कहा कि सेना अब अपने ऑपरेशन को तेज करेगी. जनरल जामिर ने कहा, "हमास को अब हमसे छिपने की कोई जगह नहीं मिलेगी. हम जंग को आगे बढ़ाने की पूरी तैयारी में हैं. ग़ज़ा में ज़मीनी अभियान शुरू हो चुका है. सेना उन जगहों में घुस रही है जहां पहले कभी नहीं गई थी और वहां पूरी ताकत से कार्रवाई हो रही है."
यहूदी सेना प्रमुख एयाल जामिर ने कहा कि "इजराइली सेना ने ग़ज़ा सिटी पर बड़े पैमाने पर हमले की तैयारी करते हुए हजारों रिज़र्व सैनिकों को बुलाना शुरू कर दिया है." ग़ज़ा सिटी को हमास का आखिरी बड़ा गढ़ माना जाता है. जानकारी के मुताबिक, इस अभियान में करीब 1.30 लाख रिजर्व सैनिक और 5 रेगुलर डिविजन शामिल होंगे. यह ऑपरेशन कई चरणों में चलेगा और 2026 तक जारी रहेगा.
फिलहाल दो डिविजन ग़ज़ा पट्टी में पहुंचकर ग़ज़ा सिटी को घेरने लगे हैं, जबकि अन्य ब्रिगेड पास के इलाकों में जमा हो रही हैं. इससे पहले बीते माह अगस्त में कनेस्सेट की विदेशी मामलों और रक्षा समिति ने सेना को 4.3 लाख सैनिकों को बुलाने की इजाजत दी थी. इजराइली डिफेंस फोर्सेज (IDF) के सीनियर अधिकारियों ने बताया कि सेना को सुनियोजित ढंग से सिलसिलेवार तरीके से बुलाया जाएगा.
इसके तहत ग़ज़ा पर कब्जे के लिए पहली खेप में 40 से 50 हजार इजराइली रिजर्व सैनिक 2 सितंबर को रिपोर्ट करेंगे. इसके बाद अगले चरण में बाकी के यहूदी सैनिकों को 2025 के आखिर तक और 2026 की शुरुआत में बुलाया जाएगा. हालांकि, सभी सैनिक ग़ज़ा नहीं भेजे जाएंगे. इनमें से कई को दूसरे मोर्चों पर तैनात स्थायी जवानों की जगह लगाया जाएगा.
ग़ौरतलब है कि हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद से रिज़र्व सैनिकों को लगातार बुलाया जा रहा है. नेतन्याहू सरकार हर महीनों इमरजेंसी आदेश बढ़ाती रही हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत बड़ी संख्या में नागरिकों को सेना में शामिल किया जा सके. सामान्य हालात में इस तरह के बड़े पैमाने की तैनाती नहीं होती. इस समय सैनिकों को पहले से सूचना दी जाती है और उनकी सेवा अवधि भी कम होती है.
यहूदी सेना 7 अक्टूबर 2023 से लगातार दो सालों में ग़ज़ा में लगातार हवाई और जमीनी हमले कर रही है. नेतन्याहू सरकार के आदेश से किए जा रहे हमलो में अब तक 63,633 बेगुनाह फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है, जबकि 160,914 लोग घायल है. ग़ज़ा के अधिकारियों के मुताबिक, 11,000 आम नागरिक लापता है. आशंका जताई जा रही है कि इनकी इजराइली हमलों में मौत हो चुकी है.
यूनाईटेड नेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, हवाई और जमीनी हमलों में इजराइली सेना ने ग़ज़ा में अक्टूबर से सिंतबर तक लगभग 80 फीसदी बुनियादी ढांचों को नेस्तानाबूद कर दिया है. इसकी वजह से 15 लाख से ज्यादा परिवार बेघर हो चुके हैं. जबकि ग़ज़ा की कई महीनों से नाकाबंदी की वजह से यहां खाने पीने की किल्लत हो गई है. आलम यह है कि ग़ज़ा में भुखमरी और कुपोषण से बीते 24 घटों में 13 लोगों की मौत हो गई, जिससे भूख से मरने वालों का आंकड़ा 361 पर पहुंच गया है. इनमें 130 बच्चे हैं.