Israel Gaza Attack: इजरायल ने अब दक्षिण गाज़ा सिटी के इलाकों से भी जबरन लोगों को निकालने के आदेश दिए हैं. संयुक्त राष्ट्र (UN) का कहा है कि 18 मार्च को इसराइल द्वारा संघर्षविराम तोड़ने के बाद से अब तक करीब 2,80,000 फिलिस्तीनी जबरन बेघर हो चुके हैं.
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Israel Gaza Attack: गाजा में इजरायल के हमले लगातार जारी है औ स्थिति बेहद गंभीर होती जा रही है. इजरायल के ताजा हमले में कम से कम 38 मासूम फिलिस्तीनियों की जान चली गई है, इनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. इजरायली फौज ने गाजा के उत्तरी हिस्से को चारों तरफ से घेर लिया और भीषण गोलीबारी कर रही है. उत्तरी गाजा में पानी के एक-एक बूंद के लिए तरस गए हैं. लोगों को बुनियादी ज़रूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है. हमास के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है.
इजरायल ने अब दक्षिण गाज़ा सिटी के इलाकों से भी जबरन लोगों को निकालने के आदेश दिए हैं. संयुक्त राष्ट्र (UN) का कहा है कि 18 मार्च को इसराइल द्वारा संघर्षविराम तोड़ने के बाद से अब तक करीब 2,80,000 फिलिस्तीनी जबरन बेघर हो चुके हैं. ये लोग पहले ही युद्ध और हमलों की वजहों कई बार अपना घर छोड़ चुके हैं, और अब फिर से उन्हें सुरक्षित जगह की तलाश करनी पड़ रही है.
इजरायल पर UN का संगीन इल्जाम
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इजरायली सेना पर गाजा स्थित एक अस्पताल पर हमला करने का संगीन लगाया है और कहा है कि इजरायली हमले में कम से कम 15 डॉक्टरों और इमरजेंसी सेवा में लगे लोगों की जान चली गई. ये सभी लोग घायल लोगों की मदद कर रहे थे. वहीं, फिलिस्तीनी रेड क्रिसेंट सोसाइटी (Palestine Red Crescent Society) के अध्यक्ष ने इसे “युद्ध का सबसे काला दिन” बताया है और कहा है कि यह एक संभावित युद्ध अपराध है. घायल लोगों की मदद करने वाले मेडिकल स्टाफ को मारना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के खिलाफ है.
भोजन के लिए तरस रहे हैं फिलिस्तीनी
गाज़ा में स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही चरमरा चुकी है. अस्पतालों में दवाइयों की भारी कमी है और घायलों का इलाज करना मुश्किल हो गया है. इसके अलावा, बिजली और ईंधन की कमी के कारण जीवन बहुत कठिन हो गया है. जो लोग किसी तरह बच गए हैं, उन्हें भी भोजन, पानी और दवाइयों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
गाजा के लोग चाहते हैं शांति से जीना
मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र ने इजरायल से अपील की है कि वह आम नागरिकों, खासकर महिलाओं, बच्चों और स्वास्थ्यकर्मियों को निशाना बनाना बंद करे. अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी मांग की जा रही है कि वह फौरन हस्तक्षेप करे और इस हिंसा को रोके. गाज़ा में रहने वाले लोग बेहद कठिन हालात में हैं. बार-बार विस्थापन, घरों की तबाही, अपनों की मौत और ज़रूरी चीजों की कमी ने उनकी ज़िंदगी नर्क बना दी है. वे बस यही उम्मीद कर रहे हैं कि यह युद्ध जल्द खत्म हो और उन्हें शांति से जीने का अधिकार मिल सके.